Saturday, January 31

दिल्ली में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का खौफनाक सच बाहर से लाए गए नाबालिगों से कराई जा रही मजदूरी, रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे 2023 से 2026 के बीच 6,700 से ज्यादा बच्चे दिल्ली में तस्करी के शिकार

नई दिल्ली।
देश की राजधानी दिल्ली में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का एक भयावह चेहरा सामने आया है। बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से लापता होने वाले बच्चे भले ही कम संख्या में मानव तस्करी का शिकार होते हों, लेकिन बाहरी राज्यों से हर साल हजारों नाबालिगों को राजधानी लाकर उनसे मजदूरी कराई जाती है।

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बाहरी राज्यों से लाए जाते हैं बच्चे

JRC के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 29 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में मानव तस्करी के शिकार 6,759 नाबालिगों को मुक्त कराया गया। इनमें 2,134 लड़कियां और 3,281 लड़के शामिल हैं। इस दौरान दिल्ली में 2,407 चाइल्ड ट्रैफिकिंग के मामले दर्ज किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, ये बच्चे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से लाए गए थे और उन्हें मजदूरी, घरेलू काम और अन्य शोषणकारी गतिविधियों में झोंका गया।

देशभर में और भी गंभीर हालात

रिपोर्ट बताती है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। JRC से जुड़े 250 से अधिक सहयोगी संगठनों ने इसी अवधि में 1,25,408 बच्चों को तस्करी गिरोहों के चंगुल से मुक्त कराया। इस दौरान 86,459 ट्रैफिकिंग केस दर्ज किए गए। मुक्त कराए गए बच्चों में 28,797 लड़कियां और 67,387 लड़के शामिल हैं।

संस्था का कहना है कि ये बच्चे न तो घर से भागे थे और न ही परिजनों से बिछड़े थे, बल्कि लालच, धोखे और धमकी के जरिए गिरोहों के जाल में फंसाए गए।

नवजात चोरी का मामला आज भी अनसुलझा

दिल्ली में नवजात चोरी की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। दिसंबर 2024 में जीटीबी अस्पताल के लेबर रूम से जन्म के महज एक घंटे बाद चोरी हुआ नवजात अब तक बरामद नहीं हो सका है। सीमापुरी निवासी कार्तिक शर्मा के मुताबिक, नर्सरी में भर्ती किए जाने के कुछ ही मिनटों बाद एक महिला बच्चे को लेकर फरार हो गई थी। तीन साल बीत जाने के बावजूद बच्चा लापता है।

गुमशुदा बच्चों के लिए दिल्ली पुलिस की SOP

दिल्ली पुलिस ने गुमशुदा बच्चों और वयस्कों की तलाश के लिए 12 अप्रैल 2022 को एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू की है। इसके तहत:

  • हर थाने में शिकायतकर्ताओं के लिए फैसिलिटेशन डेस्क अनिवार्य
  • प्रत्येक थाने में अलग मिसिंग रजिस्टर, जिसकी मासिक समीक्षा एसीपी करेंगे
  • शिकायत मिलते ही जुवेनाइल वेलफेयर ऑफिसर और जांच अधिकारी को सक्रिय करना
  • बच्चे की पूरी जानकारी और हालिया फोटो के आधार पर तुरंत जांच शुरू करना

पुलिसकर्मियों को इनाम-इकराम

गुमशुदा बच्चों की बरामदगी को प्रोत्साहित करने के लिए SOP में इनाम की भी व्यवस्था है। 12 महीने में 18 साल से कम उम्र के 80 या अधिक बच्चों (जिसमें 25 बच्चे 14 साल से कम हों) को ढूंढने पर सिपाही, हवलदार और ASI को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जाएगा।

ऐसे दर्ज कराएं गुमशुदगी की शिकायत

  • सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन में
  • हेल्पलाइन नंबर 23241210 या 1094 पर
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से
  • ईमेल, SMS, व्हाट्सऐप या फैक्स द्वारा
  • दिल्ली पुलिस के वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप पर

रिपोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का भी सवाल है।

 

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