Saturday, January 31

इटावा: सैकड़ों साल पुरानी ‘बीहड़ वाले सैयद बाबा’ मजार पर बुलडोजर की तैयारी, खादिम दस्तावेज पेश नहीं कर पाए

इटावा। यूपी के इटावा में सैकड़ों साल पुरानी मजार पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। यह मजार फिशर वन क्षेत्र में स्थित है और ‘बीहड़ वाले सैयद बाबा’ के नाम से जानी जाती है। वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बने इस मजार पर प्रशासन ने नोटिस चस्पा कर दिया है।

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मजार के खादिम फजले इलाही से 22 जनवरी तक अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन वह समय सीमा तक कोई प्रमाण नहीं दे पाए। जवाब की समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने मजार पर नोटिस चस्पा कर दिया।

वन विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई तेज कर दी थी। अधिकारियों के अनुसार, इस मजार पर हर गुरुवार भारी भीड़ जमा होती है और बिना अनुमति के उर्स का आयोजन होता रहा है।

मजार पर जाने वाले लोग प्रशासन की कार्रवाई को आस्था पर चोट बताते हुए चिंता व्यक्त कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि मजार तक पहुंचने वाले रास्ते पर प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से गहरे गड्ढे खोद दिए हैं और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

डीएफओ विकास नायक का बयान
डीएफओ विकास नायक ने बताया कि फिशर वन क्षेत्र वन विभाग की जमीन है। इस पर बनी मजार की जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि हुई है। मजार के केयरटेकर को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। यदि उनके पास कोई दस्तावेज हैं तो वह प्रस्तुत कर सकते हैं।

ऐतिहासिक महत्व
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1194 में इटावा में आक्रमणकारी मोहम्मद गोरी और कन्नौज के राजा जयचंद के सेनापति सुमेर सिंह के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन दर्जनों सैनिकों के साथ मारे गए थे। माना जा रहा है कि फिशर वन में मौजूद यह मजार शमसुद्दीन की ही है।

 

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