Saturday, January 31

गाजियाबाद: 20 साल में बने 28 हजार दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच, फर्जी पाए गए तो सरकारी नौकरी जाएगी

गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग ने फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की है। पिछले 20 साल में बनाए गए करीब 28 हजार सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी। जांच में फर्जी पाए जाने पर न केवल सरकारी नौकरी जाएगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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विभाग के अनुसार, अधिकतर फर्जी सर्टिफिकेट आंख, नाक और कान की बीमारियों का हवाला देकर बनाए गए हैं। इस मामले की निगरानी नोडल अधिकारी अनवर अंसारी करेंगे। उन्होंने बताया कि मेडिकल टीम की पूरी काउंसलिंग और जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

2005 के बाद बने सर्टिफिकेट्स की जांच शुरू हो गई है। इसमें कम दिखाई देने, कम सुनने, बोलने में असमर्थ, दुर्घटना के बाद विकलांग और मानसिक रोग से पीड़ित लोगों के मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभाग को शिकायतें मिली हैं कि कुछ लोग 33 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद 50–55 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवा लेते थे और सरकारी नौकरी या योजनाओं का लाभ उठाते थे।

प्रत्येक सोमवार को जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा दिव्यांगों की पूरी जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, कान-नाक-गला विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन और एक हेड डॉक्टर शामिल होते हैं।

वर्ष 2015 के बाद जिले में दिव्यांग प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जाने लगे थे। अब फर्जी मामलों की पुष्टि के लिए दस्तावेज़ों, मेडिकल बोर्ड की संस्तुति और वास्तविक दिव्यांगता का परीक्षण किया जाएगा। फर्जी पाए जाने वाले लाभार्थियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

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