
मुंबई: ठाणे महानगर पालिका (मनपा) में महापौर और उपमहापौर के पदों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के बीच सवा–सवा साल का फॉर्म्यूला तय किया गया है। इसके तहत अगले पाँच वर्षों में महापौर और उपमहापौर पद पर चार-चार बार रोटेशन होगा।
इस समझौते के अनुसार, पूरे पांच वर्षों में महापौर पद शिंदे गुट की शिवसेना के पास और उपमहापौर भाजपा के पास ही रहेगा। शिवसेना की शर्मिला पिंपलकर–गायकवाड महापौर होंगी, जबकि बीजेपी के कृष्णा पाटील उपमहापौर के पद पर विराजमान होंगे।
दोनों उम्मीदवारों ने शुक्रवार को डीसीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में नामांकन पत्र दाखिल किए। किसी विरोधी उम्मीदवार के नामांकन न होने से उनका निर्वाचन निर्विरोध तय माना जा रहा है। अधिकृत घोषणा 3 फरवरी को होगी। नामांकन प्रक्रिया के दौरान सांसद नरेश म्हस्के, विधायक निरंजन डावखरे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मिला लाभ
महापौर पद अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित था। सुप्रीम कोर्ट के 1998 के निर्णय के चलते नियम में बदलाव किया गया और कोपरी प्रभाग-20 से शर्मिला पिंपलकर को दूसरी बार निर्वाचित होने का लाभ मिला। वहीं प्रभाग-11 से लगातार तीसरी बार निर्वाचित कृष्णा पाटील उपमहापौर बने।
सियासी पृष्ठभूमि:
महायुति गठबंधन में शिंदे शिवसेना को 75 और बीजेपी को 28 सीटें मिली हैं। SC वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर शिंदे शिवसेना के 7 और बीजेपी के 2 नगरसेवक चुने गए हैं। शिंदे शिवसेना और बीजेपी के कई दावेदार थे, लेकिन अंतिम समय में सभी दावेदारों को पीछे हटना पड़ा।
BJP ने दी थी चेतावनी:
बीजेपी ने पहले संकेत दिया था कि यदि उन्हें मनपा में प्रमुख पद नहीं मिला, तो वे चुनावी वादों और ठाणेकरों के हित के लिए अलग भूमिका निभा सकती है। विधायक निरंजन डावखरे ने कहा था कि पारदर्शी कार्यभार और जनता के हित के लिए बीजेपी को प्रमुख पद मिलना जरूरी है। हालांकि, अंततः बीजेपी ने समझौते को स्वीकार कर लिया।
इस समझौते के बाद ठाणे महानगर पालिका में महापौर और उपमहापौर के पदों को लेकर चल रही राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त हो गई है।