आगरा।
दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को लेकर चल रहा ताजमहल–तेजो महालय विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ताजमहल को तेजो महालय शिव मंदिर बताते हुए पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग संबंधी याचिका पर आगरा की अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता कुंवर अजय सिंह तोमर की ओर से दलीलें पेश की गईं, जबकि मामले में पक्षकार बनने को लेकर विवाद भी सामने आया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सावन मास में ताजमहल परिसर स्थित कथित तेजो महालय में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की अनुमति दिए जाने की मांग को लेकर बहस हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष को पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर भी सुनवाई हुई।
पक्षकार बनाने की अर्जी पर बहस
याचिकाकर्ता अजय तोमर की ओर से पेश वकील शिव आधार सिंह तोमर ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर पक्षकार बनने की अर्जी का विरोध किया। उन्होंने अदालत से इस अर्जी को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि संबंधित पक्ष के पास मामले में शामिल होने का कोई ठोस आधार नहीं है।
वहीं, सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी की ओर से वकील रईसुद्दीन ने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा और वादी पक्ष की दलीलों की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी।
याचिकाकर्ता का दावा
कुंवर अजय सिंह तोमर का कहना है कि सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी को मामले में पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जैदी के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं और वे न्यायालय का समय बर्बाद करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैदी पहले यूरस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और अब मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्षकार बनने की कोशिश कर रहे हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि 23 सितंबर 2024 को कांग्रेस नेता सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी ने ताजमहल को वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताया था, जिसके बाद उन्होंने अदालत में पक्षकार बनने की अर्जी दाखिल की। इसके विरोध में अजय तोमर के वकील ने 7 अक्टूबर 2024 को आपत्ति दर्ज कराई थी। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी 27 नवंबर 2024 को आपत्ति दाखिल करते हुए ताजमहल की देखरेख और जिम्मेदारी एएसआई की होने की बात कही थी।
क्या है तेजो महालय का दावा
अजय तोमर की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में तेजो महालय नामक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसका निर्माण 1155 से 1212 के बीच शासन करने वाले राजा परमार्दिदेव ने कराया था। याचिका में कहा गया है कि बाद में राजा मानसिंह और राजा जयसिंह ने इसे महल का स्वरूप दिया, जबकि मंदिर को संरक्षित रखा गया। आरोप है कि मुगल काल में शाहजहां ने इसे हड़पकर मुमताज का मकबरा घोषित कर दिया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि तेजो महालय करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां पूजा–अर्चना की अनुमति दी जानी चाहिए।