
जोधपुर: जोधपुर में दिनदहाड़े हुए सनसनीखेज अपहरण मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई। खांडा फलसा थाने के दो कांस्टेबल परसाराम और जगदीश को पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। तकनीकी जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस ने 5 बदमाशों को गिरफ्तार कर अपहृत 18 वर्षीय युवक मनान को सकुशल छुड़ा लिया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह पूरी साजिश रुपये के लेनदेन के विवाद में रची गई थी।
पूरा मामला क्या है?
29 जनवरी की दोपहर मेड़ती गेट निवासी मोहम्मद उमर के बेटे मनान चाय पीने जा रहे थे, तभी सफेद बलेनो कार में आए नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें जबरन अगवा कर लिया। डीसीपी (ईस्ट) पीडी नित्या के निर्देशन में जांच शुरू की गई। जैसे-जैसे मामले की तहें खुलीं, चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
खाकी का ‘खलनायक‘ अवतार
मुख्य आरोपी राकिब के मोबाइल कॉल डिटेल (CDR) खंगालने पर पता चला कि खांडा फलसा थाने के कांस्टेबल परसाराम और जगदीश लगातार बदमाशों के संपर्क में थे। तकनीकी सबूतों ने पुष्टि की कि दोनों वर्दीधारी जवान इस साजिश में शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने दोनों कांस्टेबलों को निलंबित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस लाइन रहेगा।
पकड़े गए आरोपी और अपहरण की वजह
पुलिस ने फैजान शाह, राकिब, आसिफ अली, कमलेश कुमार और भावेश पटेल को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि अपहर्ता और मनान पहले से परिचित थे और उनके बीच रुपये के लेनदेन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।
एडीसीपी वीरेंद्र सिंह और एसीपी मंगलेश चुंडावत की टीमों ने जिस मुस्तैदी से आरोपियों को दबोचा, उसकी प्रशंसा हो रही है। हालांकि, दो पुलिसकर्मियों की मिलीभगत ने विभाग की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।