Sunday, February 1

अमेरिका ने अगर हमला किया तो ईरान मचा देगा कहर, जानिए शिया देश के पास कौन-कौन से विकल्प हैं

तेहरान/जकार्ता: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में एक और युद्धपोत भेजा है, जबकि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पहले से ही तैनात है। इसी बीच कतर और तुर्की जैसे देश संघर्ष रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला करने का आदेश देंगे या नहीं, यह सवाल अभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल भंडार और इस्लामिक सरकार को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान के भीतर छापामार अभियानों के लिए भी तैयार है।

ईरान का जवाब:
ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो उसका जवाब तत्काल और भयानक होगा। ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को मिसाइल हमले की चेतावनी भी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान कमजोर दिख सकता है, लेकिन उसके पास अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दे सकता है। इसके अलावा, उसके पास 2000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन पहले से ही तैनात हैं। पिछले साल इजरायल के साथ हुए संघर्ष में ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया था।

संभावित विकल्प:

  1. अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर हमला: ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला कर सकता है और इजरायल को निशाना बना सकता है। विशेष रूप से बहरीन, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को खतरा हो सकता है।
  2. प्रॉक्सी संगठनों का सक्रिय होना: ईरान खाड़ी देशों में फैले अपने प्रॉक्सी संगठन, जैसे हूती और हिज्बुल्लाह, के जरिए नए फ्रंट खोल सकता है। हूती लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले शुरू कर सकते हैं, जबकि सीरिया और इराक में भी ईरानी प्रॉक्सी सक्रिय हो सकते हैं।
  3. समुद्री मार्गों में माइन्स बिछाना: ईरान व्यापारिक समुद्री मार्गों में माइनिंग कर सकता है, जिससे ग्लोबल शिपिंग और तेल-गैस परिवहन प्रभावित हो सकता है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और LNG के लिए महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है।
  4. मध्यस्थता और बातचीत: अगर युद्ध शुरू होता है, तो ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई कतर या तुर्की जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए ट्रंप से बातचीत कर सकते हैं। हालांकि, ईरान फिलहाल झुकने के मूड में नहीं है, और मिसाइल निर्माण और प्रॉक्सी समर्थन जारी रहेगा।

इजरायली खुफिया अधिकारी डैनी सिट्रिनोविच के अनुसार, “सुप्रीम नेता समझौता कर सकते हैं, लेकिन शासन के मूल स्तंभों के खिलाफ नहीं। इसका मतलब है कि मिसाइल प्रोग्राम बंद नहीं होगा और प्रॉक्सी समूहों को समर्थन जारी रहेगा।”

 

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