
जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा का निधन न केवल एक व्यक्तिगत क्षति बल्कि आध्यात्मिक जगत के लिए भी गहरा झटका बन गया है। 28 जनवरी 2026 को उन्हें आश्रम में इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी मौत हुई। इसके बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम से ‘अग्नि परीक्षा’ वाला पोस्ट साझा किया गया, जिसने देशभर में सनसनी मचा दी।
प्रारंभिक जीवन और वैराग्य की ओर कदम
साध्वी प्रेम बाईसा का जन्म लगभग 2000-2001 के आसपास जोधपुर जिले के छोटी धनारी (अब कृष्ण नगर) में राठौड़ परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम देवीसिंह राठौड़ है। बचपन से ही उनका झुकाव भौतिक सुख-सुविधाओं की बजाय भक्ति और सत्संग की ओर रहा। जब उनकी उम्र की अन्य लड़कियां कैरियर और दुनियादारी में व्यस्त थीं, प्रेम बाईसा कृष्ण भक्ति और भजनों में लीन रहती थीं।
वे जोधपुर के बोरानाडा क्षेत्र में अपना ‘साधना कुटीर’ आश्रम चलाती थीं और कम उम्र में ही वैराग्य का मार्ग चुनकर आध्यात्मिक जीवन जीने लगीं। उनकी सुरीली आवाज और ओजस्वी प्रवचन पश्चिमी राजस्थान में उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ के रूप में लोकप्रिय बना गए।
महल से कुटिया तक का सफर
साध्वी प्रेम बाईसा ने सम्पन्न और राजसी परिवेश छोड़कर ईश्वर की शरण में जाने का मार्ग चुना। उनके भजनों और प्रवचनों में सादगी, प्रेम और आत्मानुभूति का संदेश होता था। वे अक्सर कहती थीं, “सच्चा सुख महलों में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे ईश्वर को खोजने में है।”
वायरल वीडियो और विवाद
जुलाई 2025 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वे अपने गुरु (जो उनके पिता भी थे) को गले लगाते दिख रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वीडियो पुराना है और इसे गलत तरीके से पेश किया गया। आश्रम के कुछ पूर्व कर्मियों ने उनसे 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी और मांग पूरी न होने पर वीडियो को एडिट करके वायरल किया।
रहस्यमयी निधन और इंस्टाग्राम पोस्ट
28 जनवरी 2026 की शाम को आश्रम में बीमार प्रेम बाईसा को एक कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाया। इसके तुरंत बाद उनकी हालत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत के लगभग चार घंटे बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम से पोस्ट साझा की गई, जिसे ‘सुसाइड नोट’ माना जा रहा है। पोस्ट में उन्होंने ‘अग्नि परीक्षा’ और न्याय की बात कही।
संसद सदस्य की जांच की मांग
साध्वी प्रेम बाईसा के निधन के बाद उनके समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने कंपाउंडर को गिरफ्तार कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके।
साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन महलों से कुटिया तक का सफर, त्याग और भक्ति की प्रेरक कहानी बनकर कई लोगों के लिए आज भी मार्गदर्शक बना हुआ है।