
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के माध्यम से जनता से रूबरू हो रहे हैं। यात्रा के दो चरण पूरे हो चुके हैं, और 29 जनवरी को इसका दूसरा चरण समस्तीपुर में सम्पन्न हुआ। इस दौरान दिए गए भाषण को अगर तारीख और स्थान बदल दिए जाएं, तो ऐसा लगता है जैसे रिपीट टेलीकास्ट हो रहा हो।
समृद्धि यात्रा के भाषण अक्सर पुराने जुमलों को दोहराते हुए सुनाई देते हैं। नीतीश कुमार एक ही बात को बार-बार अलग अंदाज में व्यक्त करते हैं। मसलन:
“पहले वाला कुछ किया था जी, पहले वाला सब गलत करता था, हम जब से आये हैं एक-एक काम कर रहे हैं, जानिएगा तभी न, किसी को बताइगा, हाथ उठा कर कहिए, खड़ा हो कर कहिए।”
उनकी भावभंगिमा, मंच पर आगमन और प्रस्थान एक जैसे होते हैं। लेकिन शब्द भले दोहराए जा रहे हों, उत्साह और ऊर्जा हर भाषण में देखने लायक रहती है।
पहले वाला कुछ काम किया था जी:
नीतीश कुमार अन्य नेताओं के साथ मंच पर आते हैं और भीड़ का हाथ हिला कर अभिवादन करते हैं। मंच पर आते ही वे उपस्थित लोगों और नेताओं का आभार व्यक्त करते हैं। फिर कहते हैं:
“पहले वाला कुछ काम किया था, कुछ काम नहीं किया। इसलिए अब जो काम हो रहा है, अच्छे से हो रहा है। सब इतना विकसित होगा, बिहार आगे बढ़ेगा, आपका सब बढ़िया रहेगा।”
तs बताइए जरा हाथ उठा कर:
मुख्यमंत्री हंसते हुए जनता की तरफ देखते हैं और कहते हैं:
“तो सब ठीक है न! सब किया जा रहा है। तs बताइए जरा हाथ उठा कर!”
यह सुनकर सभा में उत्साह की लहर दौड़ जाती है। मगही और भोजपुरी मिश्रित अंदाज में उनका संवाद जनता को जोश देता है। मुख्यमंत्री फिर कहते हैं:
“खड़ा हो के बोलs, हुआ न ठीक!”
और जनता जोरदार प्रतिक्रिया देती है।
जनता का जोश देख कर मुख्यमंत्री कहते हैं, बुलंद रहिए:
मंच पर बैठे अन्य नेताओं की तरफ इशारा करते हुए नीतीश कुमार कहते हैं:
“अब देखिए, इनको भी हाथ उठा कर बताइए कि क्या काम हुआ है। आप समझ रहे हैं न! है न ठीक! बिहार आगे होगा तो आप भी आगे बढ़िएगा।”
जनता एक बार फिर हाथ उठा कर समर्थन व्यक्त करती है। यह देखकर नीतीश कुमार कहते हैं,
“बुलंद रहिए,” और हाथ हिला कर अभिवादन करते हुए मंच से प्रस्थान करते हैं।
यानी, भाषण चाहे पुराने जुमलों पर आधारित हों, जनता को जोड़ने का उनका उत्साह और तरीका हमेशा नया और प्रेरक लगता है।