
पुणे/मुंबई: महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असमय निधन के बाद एनसीपी और राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अजित पवार के निधन ने पार्टी और पवार परिवार के भीतर राजनीतिक संतुलन को हिला दिया है। फिलहाल पवार फैमिली खामोश है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार अंदरखाने कई संभावनाओं और रणनीतियों पर चर्चा चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की योजना पहले से तैयार थी। अजित पवार जिला परिषद चुनाव परिणाम के बाद 8 फरवरी को विलय की घोषणा करने वाले थे, लेकिन उनकी मौत से यह प्रक्रिया फिलहाल टल गई है। पवार परिवार को विलय से पहले सभी राजनीतिक पदों और जिम्मेदारियों को तय करना है।
उत्तराधिकारी की संभावनाएँ:
पवार परिवार और वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा है कि सुनेत्रा पवार मुंबई और महाराष्ट्र में पार्टी का चेहरा बन सकती हैं, जबकि सुप्रिया सुले दिल्ली में पार्टी की कमान संभालेंगी। अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को फिलहाल बारामती का उत्तराधिकारी माना जा रहा है।
डिप्टी सीएम और मंत्रालय:
एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने महायुति सरकार में डिप्टी सीएम का पद सुनेत्रा पवार को देने का प्रस्ताव रखा है। सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और अगर वे डिप्टी सीएम बनती हैं तो उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा। इस स्थिति में बारामती उपचुनाव में सुनेत्रा को ही एनसीपी का उम्मीदवार बनना होगा। वहीं अजित पवार के कोटे का वित्त मंत्रालय सीनियर विधायक दिलीप वाल्से पाटिल को दिया जा सकता है।
अजित समर्थक नेता पोजिशन मजबूत करने में जुटे:
सूत्रों के अनुसार, विलय से पहले एनसीपी के अजित पवार समर्थक नेता अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हुए हैं। पार्टी के नेताओं का मानना है कि विलय के बाद शरद पवार के करीबी नेता और मंत्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसी वजह से अजित गुट के नेता डिप्टी सीएम, पार्टी अध्यक्ष और मंत्रालयों पर फैसला करने की दिशा में सक्रिय हैं।
एनसीपी के पास विधानसभा में 41 विधायक हैं, जिन्होंने देवेंद्र फडणवीस की सरकार को शिंदे गुट के दबाव से बचाया। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार के समर्थक नेता जल्द ही विधायक दल की बैठक बुलाकर सुनेत्रा पवार को नेता चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।