
नई दिल्ली: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए रामायण के युद्ध कांड का उल्लेख किया गया है। सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत को अपने विरोधियों से सीख लेने में सक्षम होना चाहिए, लेकिन उन तरीकों और मूल्यों को अपनाने से बचना चाहिए जो स्वायत्तता को कमजोर कर सकते हैं। रामायण में भगवान राम द्वारा पराजित शत्रु से ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा आज के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में रणनीतिक विवेक के रूपक के रूप में काम करती है।
सर्वेक्षण में चीन के हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट (FTP) के शुभारंभ को भी महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा गया है। 2025 के अंत तक बीजिंग ने पूरे द्वीप में सीमा शुल्क व्यवस्था लागू कर दी, जिससे यह प्रांत कम-टैरिफ वाला, सर्विस-बेस्ड आर्थिक क्षेत्र बन गया। इससे न केवल चीन के भीतर व्यापार में बदलाव आएगा, बल्कि पूरे एशिया के आर्थिक भूगोल पर भी असर पड़ेगा।
वैश्विक चेतावनी
आर्थिक सर्वेक्षण भारत को आगाह करता है कि हैनान को केवल एक बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह क्षेत्रीय आर्थिक संरचना में दीर्घकालिक परिवर्तन का संकेत है। सर्वेक्षण में यह भी चेतावनी दी गई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पहले जैसी स्थिरता वाली नहीं है। विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं, वित्तीय बाजारों और राजनीतिक प्रणालियों में मध्यम से गंभीर व्यवधान की संभावना बढ़ गई है।
भारत के लिए निहितार्थ
भारत जैसी अर्थव्यवस्था, जो वैश्विक पूंजी प्रवाह पर निर्भर है, को आने वाले वर्षों में मजबूत लिक्विडिटी और बाहरी बफर्स की योजना बनानी होगी। पूंजी, ऊर्जा और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण इनपुट पर निर्भरता के कारण उसकी लचीलापन क्षमता लगातार परखी जाएगी।
सर्वेक्षण यह भी सुझाव देता है कि 2045 तक का दौर 20वीं सदी के दो विश्व युद्धों के बीच के वर्षों जैसा हो सकता है, जिसमें भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आर्थिक विखंडन और सामाजिक तनाव का लंबा दौर रहेगा। हालांकि इतिहास बताता है कि ऐसे समय में नवाचार और औद्योगिक विस्तार के अवसर भी पैदा होते हैं, बशर्ते नीतिगत प्रतिक्रिया रक्षात्मक न होकर सक्रिय हो।
वैश्विक आर्थिक माहौल में बदलाव
आज भारत के सामने जो वैश्विक आर्थिक माहौल है, वह पिछले वैश्वीकरण के चरण से मौलिक रूप से अलग है। व्यापार, प्रौद्योगिकी, वित्त और सप्लाई चेन अब केवल दक्षता या पारस्परिकता से नहीं, बल्कि रणनीतिक हितों से संचालित होती हैं। चीन का व्यापार के प्रति आक्रामक दृष्टिकोण इस बदलाव का प्रतीक है।
सर्वेक्षण इस बात पर जोर देता है कि भारत को लचीलापन बनाने के लिए धैर्य, विश्वसनीय नियम प्रवर्तन, प्रतिस्पर्धी कंपनियों और ऐसे नागरिकों की आवश्यकता है जो मानदंडों को आत्मसात करें। नीति निर्माताओं को संरक्षण और प्रतिस्पर्धा, स्वायत्तता और एकीकरण के बीच आवश्यक संतुलन बनाए रखना होगा।