
बारामती/मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार का 29 जनवरी 2026 को बारामती में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा। केवल बारामती ही नहीं, पूरा महाराष्ट्र और देश उनके असामयिक निधन से शोक में डूबा है। राजनीति में सख्त फैसलों और प्रशासनिक दृढ़ता के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार का एक ऐसा पक्ष भी था, जो कम ही लोगों को पता था—उनका भारतीय सिनेमा से गहरा पारिवारिक जुड़ाव।
राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद फिल्मों से उनका रिश्ता कभी टूटा नहीं। इसका कारण थे उनके पिता अनंतराव गोविंदराव पवार, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग के महान फिल्मकार वी. शांताराम के साथ काम किया था।
पिता को 18 साल की उम्र में खोया
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देओलाली प्रवरा में हुआ था। वे केवल 18 वर्ष के थे, जब उनके पिता अनंतराव पवार का निधन हो गया। अनंतराव, राष्ट्रवादी नेता शरद पवार के बड़े भाई थे। कम उम्र में पिता को खोने के बावजूद, उनके विचारों और कार्यों की छाप अजित पवार के जीवन में साफ दिखाई देती रही।
राजकमल स्टूडियो और वी. शांताराम से रिश्ता
अनंतराव पवार ने मुंबई में प्रसिद्ध राजकमल स्टूडियो में काम किया था, जिसकी स्थापना 1942 में महान फिल्मकार वी. शांताराम ने की थी। पारिवारिक मतभेदों के चलते वे पुणे से मुंबई आए और राजकमल स्टूडियो में असिस्टेंट सिनेमेटोग्राफर के रूप में जुड़े।
राजकमल स्टूडियो उस दौर में भारतीय सिनेमा का बड़ा केंद्र था, जहां ‘दो आंखें बारह हाथ’, ‘नवरंग’, ‘झनक झनक पायल बाजे’ और ‘अमर भूपाली’ जैसी कालजयी फिल्में बनीं। अनंतराव को कैमरा, शूटिंग मैनेजमेंट और प्रोडक्शन की तकनीकी समझ थी। बाद में उन्होंने फिल्मी दुनिया छोड़कर कृषि और सहकारी संगठनों में काम किया।
सिनेमा से जुड़ा रहा अजित पवार का सपना
भले ही अजित पवार राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन फिल्मों के प्रति उनका लगाव पिता की विरासत से जुड़ा रहा। इसका प्रमाण उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी दिया।
अक्टूबर 2025 में उन्होंने नासिक जिले के इगतपुरी में नई फिल्म सिटी स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य मुंबई के गोरेगांव फिल्म सिटी पर बढ़ते दबाव को कम करना था। मुंबई से मात्र दो घंटे की दूरी पर स्थित इगतपुरी का प्राकृतिक सौंदर्य, शूटिंग के लिए उपयुक्त माना गया। इस फिल्म सिटी से स्थानीय रोजगार, पर्यटन, होटल और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
अजित पवार के अंतिम संस्कार में राजनीति, प्रशासन और फिल्म जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियां शामिल हुईं। अभिनेता रितेश देशमुख गमगीन नजर आए। आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। अजित पवार के दोनों पुत्रों जय और पार्थ पवार ने पिता को मुखाग्नि दी।
अजित पवार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बारामती का यह बेटा राजनीति के साथ-साथ सिनेमा के लिए भी एक दूरदर्शी सोच छोड़ गया है—जो आने वाले वर्षों में उनकी स्मृति को जीवित रखेगी।