
तेहरान/वॉशिंगटन।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियारों पर अंतिम अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि तेहरान बातचीत की मेज़ पर नहीं आया, तो अगला अमेरिकी हमला “बहुत ज्यादा बुरा” होगा।
इसी बीच अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन अपने तीन विध्वंसक युद्धपोतों—USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS स्प्रुअंस और USS माइकल मर्फी—के साथ मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नौसैनिक बेड़ा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई के लिए पर्याप्त ताकत रखता है।
ट्रंप का सीधा संदेश: ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के पास समय तेजी से खत्म हो रहा है और उसे जल्द ही “निष्पक्ष और सही डील” के लिए बातचीत करनी होगी। उन्होंने दो टूक कहा,
“कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं। ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।”
ट्रंप ने जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों का भी हवाला दिया और तेहरान को याद दिलाया कि अमेरिका पहले भी कार्रवाई कर चुका है।
ट्रंप की रणनीति पर सवाल
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट स्टेनली जॉनी ने ट्रंप की धमकियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि अगर जून 2025 में ट्रंप ने वास्तव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को “खत्म” कर दिया था, तो जनवरी 2026 में न्यूक्लियर डील की जरूरत क्यों पड़ रही है?
उनके मुताबिक, असली मुद्दा लोकतंत्र या मानवाधिकार नहीं, बल्कि अमेरिका की रणनीतिक चिंता है। ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को बमबारी वाले ठिकानों तक पहुंच न देना भी अमेरिका की बेचैनी बढ़ा रहा है।
ईरान का तीखा पलटवार
ईरान ने भी अमेरिका की धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शामखानी ने चेतावनी दी कि अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब ईरान अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों पर हमलों से देगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का “तुरंत और जोरदार जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान केवल बराबरी और आपसी सम्मान पर आधारित परमाणु समझौते को ही स्वीकार करेगा, न कि धमकियों और दबाव के जरिए थोपी गई डील को।
बातचीत के कोई सार्वजनिक संकेत नहीं
ईरानी स्टेट मीडिया के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच किसी बातचीत या संपर्क की पुष्टि नहीं हुई है। इससे संकेत मिलते हैं कि फिलहाल कूटनीतिक समाधान की राह बंद नजर आ रही है।
युद्ध की ओर बढ़ता टकराव?
अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की तैनाती, ट्रंप की खुली धमकियां और ईरान की आक्रामक चेतावनियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि हालात सीधे टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। हालांकि पर्दे के पीछे कोई बातचीत चल रही हो, यह कहना मुश्किल है, लेकिन सतह पर हालात यही बता रहे हैं कि ईरान झुकने को तैयार नहीं और ट्रंप सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं।