
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बजट सत्र के अभिभाषण में ग्रामीण रोजगार को लेकर किए गए वादे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘विकसित भारत-G RAM G कानून’ के तहत गांवों में ‘125 दिनों’ का रोजगार देने के वादे को धोखा करार दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में कहा था कि इस कानून के लागू होने से गांवों में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित होगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने कहा,
“हाल के वर्षों में MGNREGA के तहत एक परिवार को औसतन केवल 50 दिन का रोजगार मिला है। यह इसलिए नहीं कि लोगों ने काम नहीं मांगा, बल्कि क्योंकि सरकार ने पर्याप्त धनराशि प्रदान नहीं की। ऐसे में 50 दिन के औसत को अचानक 125 दिन कैसे बढ़ाया जा सकता है?”
चिदंबरम ने आगे कहा कि यह वादा कोई वास्तविक गारंटी नहीं बल्कि भ्रम है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार 2024-25 और 2025-26 के लिए आवश्यक धनराशि ढाई गुना बढ़ाकर इस लक्ष्य को पूरा कर पाएगी। उनका कहना था,
“सिर्फ 125 दिन ही क्यों? यह एक खोखला वादा है। अगर सरकार सचमुच गंभीर होती तो पूरे साल यानी 365 दिन का रोजगार सुनिश्चित कर सकती थी।”
विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिति और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर बहस को तेज कर सकता है। विपक्षी दल सरकार पर रोजगार सृजन के वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते रहे हैं, वहीं सरकार अपनी नई पहलों के माध्यम से स्थिति सुधारने का दावा करती रही है। बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर और भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है।