
छत्तीसगढ़ में मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों की हड़ताल के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई। बालोद जिले की रुकमणी सिन्हा और बेमेतरा जिले की दुलारी बाई यादव का 26 जनवरी को इलाज के दौरान निधन हुआ। रसोइयां अपने मानदेय में वृद्धि की मांग को लेकर 29 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन कर रही थीं।
रुकमणी सिन्हा को 25 जनवरी को बालोद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उनकी दोपहर को मौत हो गई। रुकमणी रक्तचाप की समस्याओं से पीड़ित थीं। वहीं, दुलारी बाई यादव को 24 जनवरी को भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 जनवरी की सुबह उनका निधन हो गया।
छत्तीसगढ़ स्कूल मध्याह्न भोजन रसोइया संयुक्त संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि रसोइयों की मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रदेश अध्यक्ष रामराज कश्यप ने कहा कि आंदोलनकारियों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
वहीं, राज्य सरकार ने दोनों मौतों और हड़ताल के बीच सीधे संबंध से इनकार किया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने बताया कि रसोइयों से हड़ताल समाप्त कर अपने-अपने निवास स्थान लौटने का आग्रह किया गया था। रुकमणी सिन्हा और दुलारी बाई यादव पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं।
सरकार ने रसोइयों के मानदेय में 25 प्रतिशत वृद्धि यानी 500 रुपये की बढ़ोतरी का आदेश दिया है और कहा कि यह कदम उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का प्रतीक है। संचालनालय ने स्पष्ट किया कि हड़ताल स्थल पर मौजूदगी या प्रदर्शन का दोनों महिलाओं की मौत से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।