
दरभंगा: इतिहास के पन्नों में महारानी कामसुंदरी देवी का नाम एक ‘दानवीर’ के रूप में अंकित है। जिन्होंने देश की सेवा और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। जब-जब देश को आवश्यकता पड़ी, दरभंगा राजघराने ने अपने खजाने खोलने में कभी देरी नहीं की।
दरभंगा के संपत्ति विवादों और परिवारिक टकरावों के बावजूद, महारानी कामसुंदरी देवी की उदारता और देशभक्ति का इतिहास अमिट है। उनकी कुछ दानवीरियों की कहानियाँ आज भी देश-दुनिया में प्रेरणा देती हैं।
चीन–भारत युद्ध में 600 किलो सोने का दान
साल 1962 के चीन-भारत युद्ध के दौरान भारतीय सेना आर्थिक और सामरिक कठिनाइयों से जूझ रही थी। उस समय महारानी कामसुंदरी देवी ने देश की जरूरत को समझते हुए अपने खजाने से करीब 600 किलो सोना भारतीय सेना को दान कर दिया। उस समय इसका मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये था। आज के हिसाब से इसे अरबों रुपये के मूल्य का माना जा सकता है।
तीन निजी जेट भी देश को दान
महारानी कामसुंदरी देवी केवल सोने तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अपने निजी उपयोग के लिए रखे तीन प्राइवेट जेट भी देश को समर्पित कर दिए। ताकि आपातकालीन स्थिति में उनका इस्तेमाल भारतीय सेना और सरकार कर सके।
दरभंगा एयरपोर्ट की भूमि भी दान
महारानी ने दरभंगा एयरपोर्ट के लिए अपनी निजी जमीन भी दान में दी। लगभग 90 एकड़ भूमि आज देश और दुनिया के लिए हवाई संपर्क का मार्ग प्रदान कर रही है। उनके इस दान से दरभंगा एयरपोर्ट विकसित हुआ और नागरिक उड्डयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महारानी कामसुंदरी देवी की यह दानवीरता न केवल दरभंगा, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्रभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में व्यक्त होती है।