
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल दाखिले में धोखाधड़ी के एक मामले में चिंता जताते हुए कहा है कि बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक कोटे का लाभ उठाने का प्रयास असली अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन है। कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट ने यह कड़ी टिप्पणी मंगलवार को दो अपर कास्ट उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे से दाखिला लेने का प्रयास किया। दोनों उम्मीदवारों ने दावा किया कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है और स्थानीय एसडीओ द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया।
सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों से सवाल किया कि आप जाति से कौन हैं, जिस पर उनका जवाब था – जाट। इस पर कोर्ट ने कहा, “आप अपर कास्ट हैं, फिर अल्पसंख्यक कैसे बन गए?” कोर्ट ने इस व्यवहार को फ्रॉड का नया तरीका बताते हुए असली अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर अंकुश लगाने जैसा बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से यह भी पूछा कि अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र जारी करने के क्या दिशानिर्देश हैं, और क्या एक अपर कास्ट उम्मीदवार को बौद्ध अल्पसंख्यक माना जा सकता है। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो एसडीओ ने प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किया? कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
इस मामले से स्पष्ट है कि मेडिकल दाखिले में अल्पसंख्यक कोटे का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निगरानी और प्रमाणपत्र जारी करने में पारदर्शिता की आवश्यकता है।