
रियाद/तेहरान, 28 जनवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में अपने दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को भी ईरान की तरफ भेज दिया है। ऐसे में सऊदी अरब ने ईरान के समर्थन में खुलकर बयान दिया है।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत की और आश्वासन दिया कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान सऊदी एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। MBS ने कहा कि सऊदी अरब ईरान की संप्रभुता का सम्मान करता है और क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने के लिए किसी भी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का समर्थन करता है।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इस समर्थन के लिए सऊदी अरब को धन्यवाद दिया और कहा कि इस्लामिक देशों की एकता और एकजुटता क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की गारंटी दे सकती है। उन्होंने अमेरिका की धमकियों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे दबाव क्षेत्र की स्थिरता बिगाड़ने के अलावा कुछ हासिल नहीं कर सकते।
इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है। IRGC के नौसेना के राजनीतिक उप प्रमुख मोहम्मद अकबरज़ादेह ने कहा, “पड़ोसी हमारे दोस्त हैं, लेकिन अगर उनकी जमीन, आसमान या पानी का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया गया, तो उन्हें दुश्मन माना जाएगा।” माना जा रहा है कि इस चेतावनी का इशारा कतर और बहरीन की तरफ है, जहां से अमेरिकी हमले की संभावना जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा कतर में स्थित है। पाकिस्तान की जमीन के इस्तेमाल का भी जिक्र किया जा रहा है, हालांकि पाकिस्तान ने ऐसा नहीं करने का ऐलान किया है।
संक्षेप में: सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ती एकजुटता, अमेरिका के खिलाफ क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।