
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Deal) के बाद अमेरिका की नाराजगी साफ तौर पर दिख रही है। ट्रंप प्रशासन ने भारत को निशाना बनाने के लिए बहाने निकालने शुरू कर दिए हैं। अब अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने रूस से तेल खरीद को लेकर बयान दिया है।
ग्रीर के अनुसार, वॉशिंगटन अभी भी भारत की रूसी तेल खरीद पर नजर रख रहा है और अमेरिका की चिंताओं को दूर करने के लिए भारत को और कदम उठाने होंगे। उनका यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के दावोस में दिए बयान से उलट है। बेसेंट ने पहले कहा था कि 25% टैरिफ के बाद भारत की रूसी तेल खरीदारी कम हो गई है और यह अमेरिका के लिए बड़ी सफलता है।
विशेषज्ञों ने इसे ट्रंप प्रशासन के यू-टर्न और डबल स्टैंडर्ड के रूप में देखा है। पूर्व भारतीय राजनयिक कंवल सिब्बल ने कहा कि ट्रंप खुद रूस के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन भारत से रूस से पीछे हटने की उम्मीद रखते हैं। उनका कहना है, “ट्रंप रूस के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन भारत को रूस पर दबाव डालना चाहते हैं। यह स्पष्ट डबल स्टैंडर्ड है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की अहंकारी नीति और विरोधाभासी बयान भारत-अमेरिका संबंधों में गतिरोध पैदा कर रहे हैं, जबकि भारत-यूरोप डील को रोकने का प्रयास भी बेअसर साबित हुआ।