
जयपुर: राजस्थान विधानसभा का सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। इसके पूर्व मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण, नियमों और परंपराओं के अनुरूप संचालित करने पर सहमति बनी। सत्ताधारी और विपक्षी दोनों पक्षों ने अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि सत्र के दौरान मर्यादा और गरिमापूर्ण भाषा का पालन किया जाएगा।
सत्र से पहले आयोजित इस बैठक में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने प्रदेश सरकार को कड़ा संदेश दिया। जूली ने कहा कि बैठक में कई सार्थक और अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और हर मुद्दे पर सरकार को जवाब देना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे सरकार कोई भी उत्तर दे, लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत जवाब देना जरूरी है। जूली ने यह भी कहा कि राज्य के किसान, युवा, गरीब और महिलाएं विधानसभा की कार्यवाही को बड़ी उम्मीद के साथ देख रहे हैं।
अशांत क्षेत्र विधेयक पर सरकार को घेरा
टीकाराम जूली ने कहा कि विपक्ष सदन में कैमरों और अशांत क्षेत्र विधेयक से जुड़े सभी मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक राजस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। जूली ने कहा कि राज्य में घटनाओं के लिए जिम्मेदार तत्वों को हर कोई जानता है और ऐसे प्रयास राज्य की वर्षों पुरानी ‘अतिथि देवो भवः’ की पहचान को कमजोर करने की दिशा में हैं।
यूजीसी और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी रखी बात
टीएसपी क्षेत्र में ओबीसी आरक्षण और यूजीसी आचार संहिता से जुड़े सवालों पर जूली ने कहा कि विपक्ष सभी वर्गों के अधिकारों की लड़ाई विधानसभा में पूरी मजबूती से लड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई विधेयक गैर-भेदभाव सुनिश्चित करता है और समाज में सद्भाव बढ़ाता है, तो उस पर आपत्ति का कोई कारण नहीं है।
टीकाराम जूली के बयान से स्पष्ट हुआ कि विपक्ष अपने मुद्दों को लेकर पीछे नहीं हटेगा और सरकार से हर प्रश्न का जवाब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मांगा जाएगा।