
अंकारा/तेहरान: अमेरिका ने अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना कर दिया है। पहले एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पहले ही गल्फ ऑफ ओमान में दाखिल हो चुका है और मिडिल ईस्ट में चार युद्धपोतों, पनडुब्बियों और सप्लाई चेन जहाजों के साथ तैनात है। इस कदम से ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका काफी बढ़ गई है।
तुर्की का बफर जोन प्लान
तुर्की, ईरान में सरकार गिरने की स्थिति में बफर जोन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। तुर्की विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संसद में बंद कमरे की बैठक में सांसदों को बताया कि यदि ईरान में स्थिति बिगड़े और शरणार्थियों की लहर आए, तो उसे मैनेज करने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। अधिकारियों ने कहा कि यह ‘बफर जोन’ शरणार्थियों के प्रवाह को नियंत्रण में रखने का उपाय होगा।
सीमा सुरक्षा मजबूत
तुर्की ने अपनी 560 किमी लंबी ईरान सीमा पर सुरक्षा प्रणाली मजबूत कर दी है। इसके तहत:
203 इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टावर
43 एलिवेटर-सुसज्जित टावर
380 किलोमीटर लंबी मॉड्यूलर कंक्रीट दीवार
553 किलोमीटर लंबी रक्षात्मक खाइयाँ
ड्रोन और एयरक्राफ्ट के जरिए 24×7 निगरानी
ईरानी विरोध और हिंसा
तुर्की के अधिकारियों ने कहा कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 4,000 ईरानी नागरिकों की मौत हुई और 20,000 से अधिक घायल हुए। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया और देश में इंटरनेट दो हफ्ते से बंद है।
अमेरिका की रणनीति
खाड़ी देशों के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों और कमांडरों पर सटीक हमले की योजना बना रहा है। अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप में 90 फाइटर जेट्स, जिनमें F-35 स्टील्थ जेट्स शामिल हैं, मिडिल ईस्ट में दाखिल हैं। अमेरिकी योजना में टॉमहॉक मिसाइलों से हमले करना शामिल है।
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है, और क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सभी देशों की सतर्कता बढ़ गई है।