Wednesday, January 28

यूजीसी कानून BJP के लिए बड़ी चुनौती, विरोध-प्रदर्शन के बाद बदले मोदी सरकार के सुर

 

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नई दिल्ली: यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र और संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। विरोध का स्तर इतना बढ़ गया है कि इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया है। इस बीच मोदी सरकार के इस फैसले को बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

 

 

 

विरोध के मुख्य कारण

 

यूजीसी ने जातिगत भेदभाव रोकने का हवाला देते हुए नए नियम बनाए हैं।

छात्रों का सवाल: क्या सामान्य वर्ग के लिए समानता के नियम लागू नहीं होते?

छात्र नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक नेता अपने बच्चों को विदेश भेज देते हैं और नियम केवल आम छात्रों पर लागू होता है।

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट में मामला

 

विरोध बढ़ने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है।

शिक्षा मंत्रालय को कोर्ट में तर्क देना होगा और कानूनी सलाह ली जा रही है।

यूजीसी की ओर से जल्द ही पूरे मामले पर तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

विरोध को देखते हुए दिल्ली स्थित यूजीसी मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

 

 

 

शिक्षा मंत्री ने कहा

 

धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया:

 

“कोई भेदभाव नहीं होगा। किसी को भी नियम के खिलाफ भेदभाव के नाम पर नियम का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। यह संविधान के दायरे में ही होगा।”

 

 

 

नए नियमों पर विवाद के तीन बड़े मुद्दे

 

  1. जातिगत भेदभाव की परिभाषा – 2026 के संशोधित नियमों में SC/ST के साथ OBC समुदाय के छात्र और कर्मचारी भी शामिल हैं। सामान्य वर्ग के छात्र बराबरी का सवाल उठा रहे हैं।
  2. झूठी शिकायतों पर दंड का अभाव – 2012 और 2025 के नियमों में दंड का प्रावधान था, 2026 के रेगुलेशन में इसे हटा दिया गया। विरोधी मानते हैं कि इससे झूठी शिकायतों का खतरा बढ़ सकता है।
  3. समता समिति में प्रतिनिधित्व – नए नियमों में OBC, SC/ST, दिव्यांगजन और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होगा, लेकिन सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व नहीं।

 

 

 

बीजेपी के लिए राजनीतिक चुनौती

 

यूजीसी के नए नियम पार्टी के अंदर भी विवाद खड़ा कर रहे हैं।

कई जिला और राज्य स्तर के बीजेपी पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है।

नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है।

उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

यदि यह मुद्दा इसी तरह गरमाया रहा, तो बीजेपी के लिए चुनावी चुनौती बन सकता है।

 

 

 

इस मुद्दे पर अब देखने वाली बात यह होगी कि मोदी सरकार और बीजेपी नेतृत्व विरोध को शांत करने और छात्रों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं की चिंता को संतुलित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

 

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