Wednesday, January 28

रांची (रवि सिन्हा): झारखंड सरकार ने वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अलका तिवारी (1988 बैच, झारखंड कैडर) को राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर नियुक्त किया है। अलका तिवारी 30 सितंबर 2025 को झारखंड की मुख्य सचिव पद से रिटायर हुई थीं और कुछ ही दिनों बाद उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई। निकाय चुनाव की घोषणा राज्य निर्वाचन आयुक्त बनने के तुरंत बाद अलका तिवारी ने 27 जनवरी 2026 को झारखंड निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। उनके अनुसार, चुनाव 23 फरवरी 2026 को होंगे और परिणाम 27 फरवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे। चार साल की अवधि तक पदस्थ रहेंगी अलका तिवारी पद ग्रहण की तारीख से चार वर्ष की अवधि तक इस पद पर रहेंगी। हालांकि यदि इस अवधि के दौरान उनकी आयु 65 वर्ष पूरी हो जाती है, तो उन्हें उसी दिन पद से इस्तीफा देना होगा। उत्कृष्ट सेवा और बेदाग ईमानदारी अलका तिवारी अपने बेदाग ईमानदारी, सरलता, सादगी और कार्यकुशलता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारत सरकार के नीति आयोग में सलाहकार, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और जनजाति आयोग की सचिव के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे झारखंड के गुमला और लोहरदगा जिलों में जिला कलेक्टर (डीसी) रही हैं और वाणिज्यिक कर व वन एवं पर्यावरण विभागों में सचिव का पद संभाल चुकी हैं। उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता अलका तिवारी मेरठ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर हैं और टॉपर होने पर राज्यपाल का स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उन्होंने मैनचेस्टर विश्वविद्यालय (यू.के.) से एमएससी की और ‘विकास परियोजनाओं के प्रबंधन और कार्यान्वयन’ में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके अलावा वे रांची विश्वविद्यालय से कानून स्नातक हैं और हार्वर्ड विश्वविद्यालय (यू.एस.ए.) एवं ड्यूक विश्वविद्यालय (यू.एस.ए.) से वित्तीय समावेशन और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन पर विशेष पाठ्यक्रम कर चुकी हैं। पति भी रह चुके हैं मुख्य सचिव और राज्य चुनाव आयुक्त रिजल्ट यह है कि अलका तिवारी के पति डॉ. डी. के. तिवारी (1986 बैच, आईएएस) भी झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं और हाल ही में राज्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल पूरा किया। संयोगवश, पति के बाद वही पद अलका तिवारी को मिला, जिसे प्रशासनिक क्षेत्र में एक दुर्लभ घटना माना जा रहा है। नव नियुक्ति और परिवर्तन अलका तिवारी के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद झारखंड सरकार ने उनके स्थान पर आईएएस अविनाश कुमार को मुख्य सचिव नियुक्त किया है, जबकि अजय कुमार सिंह को विकास आयुक्त का प्रभार दिया गया है।

सहारनपुर (वैभव पांडे): उत्तराखंड में गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसी दिशा में बदरीनाथ और केदारनाथ धामों में भी कदम उठाने की प्रक्रिया जारी है। इस फैसले पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे असंवैधानिक करार दिया।

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अरशद मदनी ने कहा, “उन्हें लगता है कि देश उनका है, और वे जनता को किसी भी दिशा में ले जा सकते हैं, लेकिन समय बदल गया है। लोगों को प्यार और भाईचारे से रहना चाहिए, और यही जमीयत उलेमा-ए-हिंद सिखाता है। यह केवल केदारनाथ तक सीमित नहीं है। असम में पूरी कॉलोनियों को तोड़ा जा रहा है और लाखों मुसलमानों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है।”

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस मामले में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार ने अजीब स्थिति बना दी है। “अगर आप देश के नागरिक हैं तो अपनी नागरिकता साबित करें। अब सरकार हिंदुओं पर भी सवाल उठाना शुरू कर रही है, पूछ रही है कि वे हिंदू हैं या नहीं। यह कैसे साबित होगा?” उन्होंने सवाल उठाया।

इस फैसले के बाद गंगोत्री धाम में प्रवेश पर रोक को लेकर बहस तेज हो गई है और धार्मिक तथा संवैधानिक दायरे में चर्चा जारी है।

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