
मुंबई/ठाणे: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी नेता गणेश नाइक और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के बीच तल्खी देखने को मिली है। नाइक ने हाल ही में ठाणे में एक गणेश मंडल का दौरा करते हुए तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर बीजेपी नेतृत्व उन्हें आजादी से काम करने देता है, तो शिंदे का राजनीतिक नाम और वजूद पूरी तरह मिट सकता है।
नाइक का बयान और चुनावी असंतोष
गणेश नाइक ने बिना शिंदे का नाम लिए कहा, “हमारी पार्टी अनुशासित है। एक बार आदेश मिलने के बाद हम उसका पालन करते हैं। जब मन सहमत नहीं होता, तब भी कार्यकर्ताओं ने पार्टी अनुशासन का पालन किया और चुप रहे।”
नाइक ने हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में महायुति गठबंधन की रणनीति पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि मेयर और अन्य पद कार्यकर्ताओं के लिए होते हैं, नेताओं के लिए नहीं। उनके अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद जिस पार्टी के पास ज्यादा पार्षद हों, उसे मेयर का पद मिलना चाहिए।
नवी मुंबई में सीट बंटवारे का जिक्र
नाइक ने कहा कि नवी मुंबई में शिवसेना ने 57 सीटों की मांग की थी। बीजेपी 20-22 सीटें देने को तैयार थी। अंत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने फॉर्म भरे। नाइक ने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपनी बात बताई थी, लेकिन अंतिम फैसला नहीं लिया गया।
शिंदे गुट का पलटवार
नाइक के बयान के बाद शिंदे खेमे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा, “कोई कितना भी बोले, एकनाथ शिंदे मजबूत हैं। ठाणे शिवसेना का गढ़ है और इसे शिंदे और श्रीकांत शिंदे ने और मजबूत किया है। बातें करना आसान है, लेकिन शिंदे ने विधानसभा और नगर निगम चुनावों में खुद को साबित किया है। शिवसेना राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश नाइक और शिंदे गुट के बीच यह टकराव ठाणे और नवी मुंबई में आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।