
मुंबई: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस नए नियम पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसके दायरे, स्पष्टता और चुनिंदा तरीके से लागू किए जाने पर सवाल उठाए हैं और चेतावनी दी है कि अगर यह नियम ठीक से लागू नहीं हुए तो विश्वविद्यालय परिसरों में तनाव बढ़ सकता है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि नियमों में असमान कानूनी सुरक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा, “कैंपस में किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव गलत है। लेकिन क्या कानून सबके लिए समान सुरक्षा नहीं देना चाहिए? कानून लागू करने में भेदभाव क्यों?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि झूठे आरोपों और दुरुपयोग की स्थिति में दोषी को कैसे तय किया जाएगा। उनका कहना था कि कानून सभी के लिए साफ, सटीक और समान होना चाहिए। इसके अभाव में विश्वविद्यालयों में माहौल खराब हो सकता है।
यूजीसी एक्ट क्यों जरूरी है?
यूजीसी ने 2026 के नियम बनाए ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव विरोधी तंत्र को मजबूत किया जा सके। इन नियमों के तहत:
-
इक्विटी कमेटियां और समान अवसर केंद्र बनाना अनिवार्य होगा।
-
हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग स्क्वॉड का गठन करना होगा।
-
भेदभाव की शिकायतों को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें अप्रत्यक्ष पूर्वाग्रह और सिस्टमैटिक बहिष्कार भी शामिल है।
सामान्य वर्ग के छात्रों की चिंता
नियमों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सामान्य वर्ग के लोगों का तर्क है कि ये नियम एकतरफा हैं और आरोपियों के लिए सुरक्षा अपर्याप्त है। उनका कहना है कि ऊंची जाति के छात्रों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा सकता है।
समर्थकों का कहना
नियमों के समर्थकों का कहना है कि ये रिवर्स भेदभाव नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही और सुधारात्मक उपाय लाने के लिए हैं। इनसे यह सुनिश्चित होगा कि उत्पीड़न की शिकायतों का निवारण हो और नियमित निगरानी से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रियंका चतुर्वेदी के विरोध के बाद उद्धव सेना ने भी इस मुद्दे को उठाया है। सांसद ने कहा कि नियमों में सुधार होना चाहिए या उन्हें वापस लिया जाना चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय परिसरों में संतुलन और न्याय बना रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए यूजीसी एक्ट से उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर नियंत्रण आएगा, लेकिन इसके कार्यान्वयन में पारदर्शिता और सभी वर्गों के लिए समान सुरक्षा सुनिश्चित करना बहुत जरूरी होगा।