
वृंदावन: ब्रज की पावन भूमि वृंदावन में हाल ही में एक दुर्लभ आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब जटेरी धाम के महंत पूज्य श्री विपिन बिहारी दास जी महाराज ने सुप्रसिद्ध संत पूज्य श्री प्रेमानंद महाराज से भेंट की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि घंटों तक चले गहन सत्संग और रसिक संवाद की साक्षी बनी।
महंत विपिन बिहारी दास जी महाराज वृंदावन पहुंचे थे प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लेने और जटेरी धाम में आयोजित होने वाले भव्य धार्मिक अनुष्ठान के लिए निमंत्रण देने। इस अवसर पर दोनों संतों के बीच ब्रज भक्ति परंपरा, निकुंज रस और गोपनीय लीला स्थलों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कथा का आयोजन:
महंत विपिन बिहारी दास जी महाराज ने बताया कि 7 से 14 फरवरी तक जटेरी धाम में विख्यात कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जाएगा। इस आयोजन में प्रेमानंद महाराज को भी सादर आमंत्रित किया गया है।
रसिक पदों से भाव-विभोर हुए प्रेमानंद महाराज:
सत्संग के दौरान प्रेमानंद महाराज के विशेष अनुरोध पर महंत विपिन बिहारी दास जी महाराज ने बसंत और होली के रसिक पदों का गायन किया। स्वामी बिहार देव जी महाराज द्वारा रचित पद ‘आज बसंत बनो सखी वन में’ से निधि वन का अलौकिक वैभव जीवंत हो उठा। वहीं ‘होली खेलन श्याम बुलावत’ पद के गायन से पूरा वातावरण राधा-कृष्ण की दिव्य होली के रंगों में डूब गया। इस दौरान प्रेमानंद महाराज भाव-विभोर नजर आए।
महंत विपिन बिहारी दास जी महाराज कौन हैं?
मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर (देवरी) निवासी महंत विपिन बिहारी दास जी महाराज पिछले दो दशकों से भक्ति मार्ग पर अग्रसर हैं। वे न केवल संत हैं, बल्कि शास्त्रीय संगीत, वीणा वादन और ब्रज रसिक गायन में भी प्रकांड विद्वान हैं। उनके गायन में ब्रज का भाव इतना गहन है कि स्वयं प्रेमानंद महाराज ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
निकुंज रस की दुर्लभता:
सत्संग में वृंदावन के गोपनीय स्वरूप गोष्ठ, गोपी भाव और राधा निकुंज वाटी पर भी चर्चा हुई। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि निकुंज का यह दिव्य रस महान ऋषियों नारद और शुकदेव के लिए भी दुर्लभ है और यह केवल रसिक आचार्यों की कृपा से ही अनुभव किया जा सकता है।