Tuesday, January 27

सतपुड़ा से बांधवगढ़ पहुंचे 27 भारतीय गौर, पुनर्स्थापना कार्यक्रम का दूसरा चरण सफल

उमरिया।
मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर (इंडियन बाइसन) की आबादी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 27 भारतीय गौरों (5 नर और 22 मादा) को सफलतापूर्वक बांधवगढ़ लाया गया है। इसके साथ ही ‘गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम’ का दूसरा चरण 26 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

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यह विशेष अभियान 22 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसके तहत 593 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर गौरों को विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों से बांधवगढ़ पहुंचाया गया।

कड़ी निगरानी में हुआ 593 किमी का सफर

गौरों की शिफ्टिंग अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की गई। एक वाहन में दो से तीन गौर रखे गए, जिससे यात्रा के दौरान कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। हालांकि, साथ चल रही वन्यजीव चिकित्सकों और वन अधिकारियों की टीम ने लगातार निगरानी रखी। प्रत्येक गौर का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें सुरक्षित रूप से कल्लवाह परिक्षेत्र में बनाए गए विशेष बाड़े में छोड़ा गया।

210 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी रहे तैनात

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि यह प्रदेश स्तर का एक बड़ा वन्यजीव प्रबंधन अभियान था। इसमें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के 150 से अधिक और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 60 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। इसके अलावा, प्रदेश के नौ से अधिक अनुभवी वन्यजीव चिकित्सकों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।

इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर श्रीमती राखी नंदा ने किया, जिनके कुशल समन्वय और सतत निगरानी से यह चुनौतीपूर्ण अभियान सफल हो सका।

1998 में हो गए थे विलुप्त

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भारतीय गौर पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। इसके बाद से उनकी पुनर्स्थापना के प्रयास लगातार जारी हैं। वर्ष 2010-11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर, जबकि फरवरी 2025 में सतपुड़ा से 22 गौर बांधवगढ़ लाए गए थे। अब दूसरे चरण में 27 और गौरों के आने से यहां उनकी आबादी को नई मजबूती मिली है।

केंद्र और संस्थानों के सहयोग से चला अभियान

यह गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम भारत सरकार, मध्यप्रदेश वन विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है। इस परियोजना का नाम है—
“Population Management Strategies for Gaur: Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh”

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सभी गौर फिलहाल स्वस्थ हैं और नए वातावरण के अनुरूप ढलने की प्रक्रिया में हैं। आने वाले वर्षों में इससे बांधवगढ़ के पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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