Saturday, January 24

मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों पर था 3.97 करोड़ का इनाम जानिए—किसे और कैसे मिलती है इनामी राशि

रांची।
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई के बाद एक अहम सवाल सामने आया है। मुठभेड़ में मारे गए 16 नक्सलियों में से पांच कुख्यात माओवादी ऐसे थे, जिन पर कुल 3.97 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। चूंकि इस ऑपरेशन में एक हजार से अधिक जवान शामिल थे, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इनामी राशि का असली हकदार कौन होगा।

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यह मुठभेड़ गुरुवार को सारंडा के किरीबुरु क्षेत्र में हुई थी। इसे झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े अभियानों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले किसी भी मुठभेड़ में एक साथ 16 नक्सलियों के शव बरामद नहीं हुए थे।

किन नक्सलियों पर था करोड़ों का इनाम

इस अभियान में मारे गए पांच इनामी नक्सलियों पर कुल 3.97 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इनमें सबसे बड़ा नाम अनल दा उर्फ परमेश्वर मांझी का है, जिस पर 2.35 करोड़ रुपये का इनाम था। इस राशि में झारखंड सरकार का एक करोड़, ओडिशा सरकार का 1.2 करोड़ और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का 15 लाख रुपये शामिल थे।

अन्य इनामी नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत (90 लाख), अमित मुंडा (62 लाख), पिंटू लोहार (5 लाख) और ललजीत उर्फ लल्लू (5 लाख) शामिल थे।

इनाम वितरण के क्या हैं नियम

नक्सलियों पर घोषित इनाम की राशि को लेकर सरकार ने स्पष्ट नियम तय कर रखे हैं—

1. सुरक्षा बलों की टीम को इनाम
यदि किसी नक्सली को सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार या मारा जाता है, तो उस पर घोषित इनाम की राशि अभियान में शामिल पूरी टीम के जवानों के बीच वितरित की जाती है। राशि का बंटवारा संबंधित विभागीय नियमों के अनुसार किया जाता है।

2. मुखबिर भी हो सकता है हकदार
अगर किसी मुखबिर द्वारा दी गई सटीक सूचना के आधार पर नक्सली पकड़ा जाता है या मारा जाता है, तो इनाम की पूरी या आंशिक राशि मुखबिर को दी जा सकती है। कई राज्यों में मुखबिरों को नकद इनाम के साथ पुनर्वास या सरकारी नौकरी जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

3. आत्मसमर्पण पर नक्सली को मिलता है इनाम
सरकारी नीति के तहत यदि कोई इनामी नक्सली स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करता है, तो पुनर्वास योजना के अंतर्गत उसे उस पर घोषित पूरी इनामी राशि दी जाती है, ताकि वह मुख्यधारा में लौट सके।

इस मामले में कौन होगा हकदार

सारंडा ऑपरेशन में 1000 से अधिक जवान शामिल थे और नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई में घोषित इनाम की राशि का लाभ सुरक्षा बलों की टीम और संभवतः मुखबिर को मिल सकता है। अंतिम निर्णय संबंधित राज्य सरकारें और एजेंसियां संयुक्त रूप से करेंगी।

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