
रांची।
देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल-मुक्त भारत’ का लक्ष्य तय किए जाने के बाद झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों में बीते कुछ महीनों के दौरान कई कुख्यात माओवादी कमांडरों को मार गिराया गया है, जिससे नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
झारखंड में 16 माओवादी ढेर, अनल दा भी मारा गया
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 माओवादियों को मार गिराया। इस अभियान को ऑपरेशन मेघा नाम दिया गया था। मारे गए नक्सलियों में सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य अनल दा उर्फ परमेश्वर मांझी भी शामिल था, जिस पर 2.35 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
इस मुठभेड़ में कुल पांच ऐसे कुख्यात नक्सली मारे गए, जिन पर 5 लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक का इनाम था। 16 में से 14 नक्सलियों की पहचान कर ली गई है।
बीजापुर में पापा राव का अंत
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 17 जनवरी 2026 को सुरक्षा बलों ने माओवादी कमांडर पापा राव को एक मुठभेड़ में मार गिराया। पापा राव पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह दशकों से इलाके में आतंक का पर्याय बना हुआ था। उस पर कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश रचने का आरोप था, जिनमें अनेक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।
दिलीप बेडजा समेत छह माओवादी ढेर
बीजापुर में ही 18 जनवरी 2026 को सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में चार महिला नक्सलियों सहित कुल छह माओवादी मारे गए। इनमें कुख्यात डीवीसीएम दिलीप बेडजा, एसीएम माड़वी कोसा और अन्य सक्रिय नक्सली शामिल थे। घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए।
ओडिशा में गणेश उइके मारा गया
ओडिशा के कंधमाल जिले में 25 दिसंबर 2025 को सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी और सीपीआई (माओवादी) सेंट्रल कमेटी सदस्य गणेश उइके को मुठभेड़ में मार गिराया। उसे नक्सल नेटवर्क पर हिडमा के बाद सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है। गणेश उइके 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड बताया जाता था।
हिडमा और सहदेव सोरेन का खात्मा
नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर माडवी हिडमा उर्फ संतोष मारा गया था। वह पीएलजीए बटालियन नंबर-1 का प्रमुख और कई बड़े हमलों का साजिशकर्ता था।
वहीं झारखंड के हजारीबाग जिले में कोबरा बटालियन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक करोड़ के इनामी सहदेव सोरेन उर्फ परवेश सहित तीन कुख्यात नक्सली मारे गए थे।
नक्सल-मुक्त भारत की ओर बढ़ते कदम
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से नक्सलियों का संगठनात्मक ढांचा बुरी तरह कमजोर हुआ है। बड़ी संख्या में शीर्ष कमांडरों के मारे जाने और कैडर के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद की कमर टूटती नजर आ रही है।
केंद्र और राज्य सरकारों का दावा है कि आने वाले महीनों में अभियान और तेज होंगे तथा मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।