
भोपाल: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) के परिसर में पर्यटन विभाग की हेलीकॉप्टर सेवा को लेकर विवाद तेज़ हो गया है। विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर बने हेलीपैड और हेलीकॉप्टर उड़ानों का छात्र, पूर्व छात्र और आसपास रहने वाले लोग विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय उत्पन्न होने वाला शोर पढ़ाई में बाधा डालेगा और परिसर के पक्षियों सहित पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने पीएम श्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा के लिए विश्वविद्यालय से स्थल मांगा था। यह सेवा 20 नवंबर 2025 से शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य राज्य के प्रमुख धार्मिक, वन्यजीव और पर्यटन स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ना है। हालांकि विश्वविद्यालय समुदाय ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
पूर्व छात्र नेता धर्मेंद्र सिंह गौर ने बताया कि हेलीकॉप्टर से लगभग 110-120 डेसिबल का शोर होता है, जो क्लासों की शांति भंग कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार शोर कानों को नुकसान, मानसिक तनाव और परीक्षा में बाधा पैदा कर सकता है। गौर ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के खेल मैदान पर हेलीपैड बनाना 2015 के मध्य प्रदेश सरकार के आदेश (पत्र क्रमांक 462/मु.स./2015) और शोर प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों के आसपास दिन में 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल से अधिक शोर नहीं होना चाहिए, जबकि हेलीकॉप्टर का शोर लगभग 80-100 डेसिबल होता है।
छात्रों ने पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि हेलीकॉप्टर के शोर और धुएँ से घोंसले बनाने वाले पक्षियों की प्रजनन दर प्रभावित हो सकती है और आसपास के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में हेलीकॉप्टर सेवा के उपयोग के बारे में अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विवाद और विरोध प्रदर्शनों पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है।