
जयपुर।
राजस्थान में प्रस्तावित डिस्टर्ब एरिया एक्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे राजस्थान की संस्कृति और परंपरा पर सीधा प्रहार बताया है। सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए गहलोत ने कहा कि जिस प्रदेश की पहचान ‘पधारो म्हारे देस’, शांति और भाईचारे से है, उसे ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करने की सोच बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
‘राजस्थान की आत्मा पर चोट’
अशोक गहलोत ने लिखा कि राजस्थान सदियों से आपसी सौहार्द, सांस्कृतिक विविधता और अहिंसा का प्रतीक रहा है। ऐसे राज्य को डिस्टर्ब एरिया के दायरे में लाना न केवल उसकी छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि समाज में अविश्वास और भय का माहौल भी पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि यह कदम प्रदेश के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
शांति मॉडल बनाम सांप्रदायिक प्रयोग
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर देश का पहला ‘शांति और अहिंसा विभाग’ बनाया था। इसका उद्देश्य समाज में संवाद, प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देना था, ताकि नफरत और विभाजन की राजनीति को जगह न मिले।
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही सबसे पहले इसी विभाग को निष्क्रिय कर दिया।
उनका सवाल था—
“क्या शांति और अहिंसा विभाग को बंद करना पहले से तय रणनीति का हिस्सा था?”
‘सांप्रदायिक प्रयोगशाला’ बनाने का आरोप
अशोक गहलोत ने तीखे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि राजस्थान को धीरे-धीरे ‘सांप्रदायिक प्रयोगशाला’ में बदला जा रहा है। उनके अनुसार, डिस्टर्ब एरिया एक्ट जैसे कानून सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करेंगे और प्रदेश की मूल पहचान को नुकसान पहुंचाएंगे।
राजनीति गरमाई, जवाब का इंतजार
गहलोत के इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में नई हलचल मच गई है। अब सवाल यह है कि क्या भाजपा सरकार इन आरोपों का जवाब देगी, या यह विवाद और गहराएगा।
फिलहाल, डिस्टर्ब एरिया एक्ट को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी टकराव का केंद्र बन सकता है।