
कोटा/प्रयागराज।
प्रयागराज में पालकी स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के बीच चल रहे तीखे विवाद के बीच बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सामने आया है। कोटा से उन्होंने दोनों पक्षों को संयम और संवाद का संदेश देते हुए कहा कि “बीच का रास्ता निकालें, सनातन का मजाक दुनिया के सामने न बनने दें।”
राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा इन दिनों आस्था की नगरी में तब्दील हो गई है। रामगंजमंडी में आयोजित श्रीराम कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़कें जाम हो गईं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से आयोजित ‘गौ माता महोत्सव’ के मंच से बाबा ने न केवल धार्मिक संदेश दिए, बल्कि देश के चर्चित विवादों पर भी खुलकर राय रखी।
दोनों हमारे अपने, सुलह जरूरी: धीरेंद्र शास्त्री
प्रयागराज में पालकी स्नान को लेकर जारी टकराव पर बागेश्वर बाबा ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“शंकराचार्य भी हमारे हैं और सरकार भी हमारी है। दोनों सनातनी हैं। ऐसे मामलों में अहं छोड़कर संवाद होना चाहिए। आपसी टकराव से सनातन पर सवाल उठते हैं, जो ठीक नहीं।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विवाद लगातार राजनीतिक और धार्मिक रंग लेता जा रहा है।
युवाओं को संदेश: रील से बाहर निकलो
कथा के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया की रील्स में अपना बहुमूल्य समय गंवा रही है।
“रील नहीं, रियलिटी पर फोकस करें। परिवार, समाज और संस्कारों से जुड़ें,” — यह संदेश उन्होंने तालियों के बीच दिया।
साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने की मांग भी दोहराई।
सामाजिक समरसता की मिसाल बनी रामकथा
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब वाल्मीकि समाज और 30 गरीब परिवारों ने मंच पर आकर बाबा की आरती उतारी। इस पहल की सराहना करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रामकथा पर समाज के हर वर्ग का समान अधिकार है।
इस भव्य आयोजन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर सहित कई जनप्रतिनिधि और संत-महात्मा मौजूद रहे।
अब सबकी नजरें समाधान पर
बागेश्वर बाबा की इस ‘सुलह की सलाह’ के बाद सवाल यही है—
क्या शंकराचार्य और योगी सरकार के बीच जारी तकरार थमेगी,
या यह विवाद और गहराएगा?
फिलहाल, सनातन के नाम पर चल रहे इस टकराव में संवाद की आवाज जरूर बुलंद हुई है।