
नई दिल्ली। हल्का बुखार अक्सर आम माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में यह गंभीर इंफेक्शन की शुरुआती चेतावनी भी हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बुखार के साथ कुछ लक्षण दिखें तो देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है। हाल ही में डॉक्टर जुबैर अहमद ने एक मामले का हवाला देते हुए बताया कि मरीज को सिर्फ 2 दिन हल्का बुखार था, लेकिन तीसरे दिन उसके अंगों का काम बंद होने लगा।
गंभीर संक्रमण का शुरुआती संकेत
माइल्ड फीवर, कमजोरी या बदन दर्द जैसी सामान्य शिकायतें अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। लेकिन अगर यह संक्रमण खून में फैल जाए तो सेप्सिस बन सकता है। सेप्सिस में शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही किडनी, फेफड़े, दिल और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। यह स्थिति कुछ ही घंटों में ऑर्गन फेलियर और शॉक तक ले जा सकती है।
सेप्सिस के खतरनाक संकेत (4 लक्षण)
डॉक्टर जुबैर अहमद ने बताया कि बुखार के साथ इन लक्षणों को नजरअंदाज ना करें और तुरंत अस्पताल जाएं:
- भ्रम या होश का खोना
- बहुत कम पेशाब आना
- सांस तेज चलना या बीपी का गिरना
- ठंडी और चिपचिपी त्वचा, अत्यधिक कमजोरी
आयुर्वेदिक नजरिया
आयुर्वेद में इस तरह के तेजी से गंभीर होने वाले बुखार को ज्वर कहा जाता है। इसमें अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) कमजोर हो जाती है और आम (टॉक्सिन) बढ़ने लगते हैं। जब यह रक्त और शरीर में फैलता है, तो कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। यह आधुनिक चिकित्सा में बताए गए सिस्टेमिक इंफ्लामेटरी रेस्पॉन्स के समान है।
इलाज और सावधानियां
ऐसे मरीजों को मॉडर्न क्रिटिकल केयर में रखा जाता है। इसमें फ्लूइड थेरेपी, एंटीबायोटिक्स, ऑक्सीजन सपोर्ट और लगातार निगरानी शामिल होती है। आयुर्वेदिक उपाय इस स्थिति में सपोर्टिव रोल निभा सकते हैं, जैसे इम्यूनिटी बढ़ाना और शरीर को बचाव में मदद देना, लेकिन प्राथमिक इलाज हमेशा मॉडर्न मेडिकल सहायता होना चाहिए।
निष्कर्ष: हर हल्का बुखार गंभीर नहीं होता, लेकिन अगर यह तेजी से बढ़ रहा है और ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर की तुरंत सलाह लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे या उपाय अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।