Monday, January 26

बिहार की सियासत में ‘निशांत’ उदय? JDU पोस्टर, ललन सिंह की सलाह और नीतीश की मुस्कान

पटना।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाओं ने फिर से जोर पकड़ लिया है। पटना में हाल ही में आयोजित सरस्वती पूजा के दौरान मुख्यमंत्री और निशांत कुमार की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया।

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कार्यक्रम में निशांत कुमार पहले पहुंचे और पूजा-अर्चना की। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन के बाद दोनों पिता-पुत्र की मुलाकात हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने निशांत की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब उन्हें राजनीति में आ जाना चाहिए। नीतीश कुमार ने इस टिप्पणी पर मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं।

जेडीयू पोस्टर ने बढ़ाई चर्चा

इससे पहले पटना में जेडीयू के छात्र संगठन ने निशांत कुमार को लेकर पोस्टर लगाकर पार्टी में उनके शामिल होने की मांग की थी। पोस्टर में लिखा गया था –
अब नहीं तो कब, पार्टी को नीकु जैसा युवा नेतृत्व चाहिए अब। मिशन विकसित बिहार 2035, नीतीश सेवक, मांगे निशांत।”
पोस्टर ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर एक धड़ा निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में देखना चाहता है।

नेताओं का समर्थन और जनता की निगाहें

पूर्व में भी जेडीयू के कई नेताओं ने निशांत कुमार के राजनीति में आने का समर्थन किया है। मकर संक्रांति पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में विधायक श्याम रजक ने कहा था कि निशांत पढ़े-लिखे और ऊर्जावान हैं। उनके पार्टी में आने से JDU और बिहार दोनों को लाभ होगा। इसके अलावा, मंत्री जमा खान ने भी निशांत कुमार के जल्द पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई।

निशांत का अपना फैसला होगा

हालांकि निशांत कुमार मीडिया से दूरी बनाए रखते हुए अपने निजी कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आए हैं और पिता के काम और बिहार के विकास मॉडल पर चर्चा करते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि निशांत की राजनीति में एंट्री का अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही करेंगे। मुख्यमंत्री परिवारवाद के खिलाफ राजनीति करते हैं, इसलिए निर्णय慎慎 रूप से लिया जाएगा।

 

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