
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में नई चांदी की देहरी (चौखट) को लेकर विवाद सामने आया है। लगभग 10.5 किलो चांदी से बनी इस देहरी का वसंत पंचमी पर पूजन नहीं हो पाया, जिससे मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
मंदिर कमेटी ने 19 जनवरी को हुई अपनी 10वीं बैठक में घोषणा की थी कि वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुबह 8:30 बजे कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य नई देहरी का विधिवत पूजन करेंगे।
कानूनी नोटिस ने बढ़ाया विवाद
हालांकि, मंदिर के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी के अधिवक्ता ने कमेटी के अध्यक्ष और सचिव (मथुरा डीएम) को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में कहा गया कि देहरी पूजन ‘हरिदासी संप्रदाय’ की पारंपरिक पूजा पद्धति है और इसे केवल संप्रदाय के दीक्षित सदस्य ही कर सकते हैं।
पूर्व अध्यक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि यदि आम भक्तों को पूजा करने से रोका गया है, तो कमेटी के सदस्य यह विशेषाधिकार कैसे ले सकते हैं।
कमेटी की सफाई और रणनीति
नोटिस के बाद प्रस्तावित पूजन कार्यक्रम स्थगित हो गया। मंदिर प्रबंधन के सदस्य और सेवायत दिनेश गोस्वामी का कहना है कि कमेटी का कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय ही नहीं था। विवाद और कानूनी पचड़े के डर से कमेटी ने पूजन की योजना को स्थगित कर दिया।
पुरानी देहरियों की खोज
नई देहरी लगाने के दौरान गर्भगृह की पुरानी चौखट हटाई गई, तब एक के ऊपर एक दबा हुई 5 पुरानी देहरियां मिलीं, जिनमें 4 चांदी की और एक गिलट की है। इन ऐतिहासिक देहरियों को सुरक्षित रखने के लिए मंदिर प्रबंधन ने बैंक लॉकर में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस समय मंदिर में नई चांदी की देहरी तो स्थापित है, लेकिन इसके पूजन को लेकर विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा।