
नोएडा में गड्ढे में डूबकर इंजीनियर की मौत के बावजूद प्रशासन की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। गाजियाबाद में क्षतिग्रस्त पुलिया एक बार फिर बड़े हादसे का कारण बन गई। दिल्ली–मेरठ मार्ग पर गुरुवार रात करीब 10 बजे स्कूटी सवार भाई-बहन टूटी पुलिया के कारण संतुलन खो बैठे और सीधे बड़े नाले में जा गिरे। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें किशोरी की हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोदीनगर की सुदामापुरी कॉलोनी निवासी अनिल के परिवार में भाई की शादी की सालगिरह थी। इसी मौके पर परिवार रेस्तरां में भोजन करने गया था। लौटते समय अनिल के बेटे अजय (19) और बेटी साक्षी (17) स्कूटी से घर वापस आ रहे थे। जैसे ही वे साईं मंदिर के सामने सड़क पार कर रहे थे, नाले की पुलिया में बने गड्ढे को देखकर अजय ने स्कूटी रोकने की कोशिश की, लेकिन वाहन असंतुलित हो गया।
पीछे से टक्कर की आशंका
बताया जा रहा है कि स्कूटी नाले की दीवार से टकरा गई और दोनों भाई-बहन नाले में गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पीछे से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने स्कूटी को टक्कर मारी, जिससे वाहन अनियंत्रित हो गया।
एक घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से पहले अजय को बाहर निकाला गया। इसके बाद पास में खड़े एक ट्राला से रस्सी मंगाकर साक्षी को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किशोरी को नाले से बाहर निकाला जा सका। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां साक्षी की हालत गंभीर बनी हुई है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
एसीपी मोदीनगर अमित सक्सेना ने बताया कि घायल साक्षी से पूछताछ और प्रारंभिक जांच में पीछे से अज्ञात वाहन द्वारा टक्कर मारे जाने की बात सामने आई है। अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
वहीं, एसडीएम मोदीनगर अजीत सिंह ने कहा कि इस सड़क के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को क्षतिग्रस्त पुलिया के निर्माण के निर्देश दिए गए हैं।
बार-बार हो रहे हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पुलिया की जर्जर हालत को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे खतरनाक स्थानों की तुरंत मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी और की जान जोखिम में न पड़े।