
नोएडा सेक्टर-150 में बेसमेंट निर्माण की आड़ में हुए भीषण अवैध खनन का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस स्थान पर 16 जनवरी की रात युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हुई, वह इलाका पिछले करीब डेढ़ से दो साल तक अवैध खनन का केंद्र बना रहा। आरोप है कि इस दौरान रोज़ाना लगभग 200 डंपर रेत निकाली गई और खुलेआम बाजार में बेची जाती रही, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सीमित खुदाई की अनुमति के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर करीब 70 फीट तक जमीन खोदी गई। यहां से निकली उच्च गुणवत्ता की बालू को प्रति डंपर करीब 15 हजार रुपये में निकालकर बाजार में लगभग दोगुने दाम पर बेचा गया। इस तरह एक से डेढ़ साल में अरबों रुपये का अवैध कारोबार किया गया।
जलस्तर गिरा, इलाके बने ‘मौत के कुएं’
बेसमेंट निर्माण के नाम पर लगातार दो साल तक जमीन के भीतर से पानी निकालकर सीवर में बहाया गया। इसका सीधा असर यह हुआ कि यमुना और हिंडन नदी के बीच स्थित इस क्षेत्र का भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया। खनन के बाद कई प्लॉटों में गहरे गड्ढे छोड़ दिए गए, जो बाद में पानी से भर गए और ‘मौत के कुएं’ बन गए।
हैरानी की बात यह है कि इन खतरनाक गड्ढों के आसपास न तो कोई सुरक्षा घेरा लगाया गया और न ही चेतावनी बोर्ड। यही लापरवाही 16 जनवरी को युवराज मेहता की जान ले बैठी, जब उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई।
जिम्मेदार विभागों की भूमिका संदिग्ध
अवैध खनन पर निगरानी की सीधी जिम्मेदारी खनन विभाग की है, जबकि नोएडा अथॉरिटी का दायित्व है कि उसके द्वारा आवंटित प्लॉटों पर निर्माण कार्य बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार हो। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरण नियमों और अवैध जल दोहन पर नजर रखनी होती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर खनन चलता रहा, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप और भी गहरे हो गए हैं।
नोएडा–ग्रेटर नोएडा में सैकड़ों ऐसे प्लॉट
स्थानीय निवासियों का कहना है कि केवल सेक्टर-150 ही नहीं, बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में सैकड़ों ऐसे प्लॉट मौजूद हैं, जहां बेसमेंट के नाम पर अवैध खनन कर गहरे गड्ढे छोड़ दिए गए हैं। इनमें से कई गड्ढे आबादी और मुख्य सड़कों के बेहद पास हैं, जहां किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
बताया गया है कि यह प्लॉट पहले नोएडा अथॉरिटी द्वारा लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन को आवंटित किया गया था, जिसे बाद में अन्य डेवलपर्स को बेच दिया गया। अब सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक चल रहे इस अवैध खनन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चलता रहा।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
युवराज मेहता की मौत के बाद अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों व बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान से बचाया जा सकता था, बल्कि एक निर्दोष जान भी बच सकती थी।