
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करेंगी। इसके पहले से ही सोने की कीमतों में तेजी ने निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बना दिया है। पिछले साल सोने की कीमत में लगभग 67% की वृद्धि हुई थी और इस साल यह अब तक 11% बढ़ चुका है।
जुलाई 2024 में सोने पर कस्टम ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी गई थी। इस कटौती के बावजूद, सोने की बढ़ती कीमत ने उपभोक्ताओं के लिए स्थिति को जटिल बना दिया है। इस तेजी का सीधा असर सोने की तस्करी पर भी पड़ा है। वर्तमान में तस्करों को हर किलो सोने पर लगभग ₹11.5 लाख का लाभ हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में तेजी, डॉलर के कमजोर होने और अमेरिका में कम ब्याज दरों के कारण भारत में सोने की मांग लगातार बढ़ी है। मॉर्गन स्टेनली के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी कुल कीमत $3.8 ट्रिलियन है।
आर्थिक विश्लेषक कहते हैं कि सोने की कीमतों में मामूली कमी केवल कस्टम ड्यूटी में कटौती से आ सकती है, लेकिन इसका प्रभाव अल्पकालिक होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि चालू खाता घाटे और आयात पर नजर रखते हुए बजट में सोने पर बड़ी कटौती की संभावना कम है।
जुलाई 2024 में ड्यूटी में कटौती के बाद सोने के आभूषणों की बिक्री में 10% की वृद्धि देखी गई थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह प्रभाव जल्दी ही खत्म हो गया। FY24 और FY25 के बीच भारत ने मात्रा के हिसाब से लगभग 5% कम सोना आयात किया, लेकिन कीमतों में 25% से अधिक की वृद्धि हुई।
वित्त वर्ष 2026 का बजट पेश होने से पहले सोने की कीमतें और कस्टम ड्यूटी पर चर्चा मुख्य विषय बन गई है। निवेशक और व्यापारी इस बजट की घोषणाओं पर नजर रखे हुए हैं, जिससे आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में संभावित बदलाव का अनुमान लगाया जा सके।