
केपटाउन। दक्षिण अफ्रीका में 9 से 16 जनवरी तक BRICS देशों के नौसैनिक अभ्यास के दौरान विवाद खड़ा हो गया। चीन, रूस और ईरान के युद्धपोतों ने दक्षिण अफ्रीकी समुद्री तट पर अभ्यास किया, जबकि भारत ने इसमें भाग नहीं लिया। अब दक्षिण अफ्रीका में अभ्यास को लेकर राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के खिलाफ आलोचना और जांच शुरू हो गई है।
अभ्यास का ब्योरा:
- अभ्यास में चीन और ईरान ने डिस्ट्रॉयर तैनात किए, रूस और UAE ने कोरवेट भेजा, मेजबान दक्षिण अफ्रीका ने फ्रिगेट उतारा।
- इंडोनेशिया, इथियोपिया और ब्राजील पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए।
- भारत ने सुरक्षा और राजनयिक कारणों से इसमें भाग नहीं लेने का फैसला किया।
अमेरिका की नाराजगी:
अभ्यास से पहले ही अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि ईरान की भागीदारी से दक्षिण अफ्रीका को राजनयिक और सुरक्षा संबंधों में खतरा हो सकता है। अमेरिकी दूतावास ने 15 जनवरी को यह कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने ईरानी सुरक्षा बलों का स्वागत कर वैश्विक न्याय और मानवाधिकारों की अवहेलना की है।
दक्षिण अफ्रीका में प्रतिक्रिया:
- राष्ट्रपति रामफोसा ने 9 जनवरी को ईरान को अभ्यास से बाहर करने का आदेश दिया था।
- इसके बावजूद तीन ईरानी जहाज अभ्यास में शामिल रहे।
- विपक्षी दल डेमोक्रेटिक अलायंस (DA) ने रक्षा विभाग को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि देश को गंभीर राजनयिक और आर्थिक जोखिम में डाल दिया गया।
भारत ने लिया सुरक्षित फैसला:
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का अभ्यास से दूरी बनाना सही रणनीति रही। भारत के शामिल होने पर अमेरिका के गुस्से के कारण द्विपक्षीय संबंध और तनावपूर्ण हो सकते थे।
BRICS क्या है:
BRICS समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। बाद में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और UAE भी जुड़े। यह समूह शुरू में ट्रेड पर केंद्रित था, लेकिन अब इसमें सुरक्षा, संस्कृति और सहयोग को भी शामिल किया गया है।