
जोधपुर। जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद लद्दाख के प्रसिद्ध क्लाइमेट एक्टिविस्ट और मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने जेल की बैरकों को अपने नवाचार प्रयोग का केंद्र बना लिया है। 119 दिनों से सलाखों के पीछे कैद यह वैज्ञानिक अब चींटियों के व्यवहार और टीम वर्क से सीख लेकर जेल की संरचना को इको-फ्रेंडली बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
जेल में वैज्ञानिक प्रयोग:
वांगचुक ने बैरक में चींटियों पर आधारित किताब ‘एंट्स: वर्कर्स ऑफ द वर्ल्ड’ मंगवाई है और उनकी गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने प्रशासन से थर्मामीटर की मांग की है ताकि बैरकों के तापमान और वास्तुकला का अध्ययन कर पर्यावरण अनुकूल (इको-रिस्पॉन्सिव) बदलाव किया जा सके।
NSA के तहत हिरासत:
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। लद्दाख को पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग के आंदोलन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई। उनकी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
जेल के सुधार में पिछली पहल:
सोनम की यह कोशिश जेल की बैरकों को सुधारने की पहली नहीं है। इससे पहले अभिनेता सलमान खान ने अपनी सजा के दौरान जेल के शौचालयों का जीर्णोद्धार और कैदियों की सुविधा बढ़ाने की पहल की थी।
सोनम वांगचुक की यह पहल दर्शाती है कि सलाखों के पीछे भी विज्ञान और नवाचार की राह नहीं रुकती। जेल की बैरक अब ‘इको-फ्रेंडली’ प्रयोगशाला बन सकती है, जिसमें कैदी भी लाभान्वित होंगे।