
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता और वयस्कों के बीच बने रिश्तों के टूटने को अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 12 जनवरी को सुनाए गए फैसले में कहा कि ऐसे मामलों को संवेदनशीलता, संयम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए निपटाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि एक शिक्षित वयस्क व्यक्ति जो स्वेच्छा से प्रेम संबंध बनाता है, उसे यह समझना चाहिए कि हर रिश्ता शादी में बदलना जरूरी नहीं है। ऐसे रिश्ते व्यक्तिगत, व्यावहारिक या परिस्थितिजन्य कारणों से समाप्त हो सकते हैं, जिसमें असंगति या प्राथमिकताओं में बदलाव शामिल हैं।
यह टिप्पणी दिल्ली के एक शिक्षाविद के खिलाफ दर्ज रेप और SC/ST एक्ट के मामले में दी गई। मामला सितंबर 2023 में दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था, जिसमें लंबे पर्सनल रिश्ते के टूटने के बाद आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने जांच के बाद पाया कि रिश्ता आपसी सहमति से था और शिकायतकर्ता ने इसके टूटने के बाद आपराधिक कानून का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी के झूठे वादों का आरोप रिकॉर्ड से साबित नहीं होता।
जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस तरह के झूठे आरोप न केवल आरोपी बल्कि उसके परिवार की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकते हैं।
