Saturday, January 24

ब्रजेश पाठक मंच पर फफक-फफक कर रो पड़े, संघर्ष के दिनों को याद कर छलके आंसू

 

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गए और मंच पर ही फफक-फफक कर रो पड़े। यह घटना नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती की पूर्व संध्या पर मेरठ के पीएल शर्मा स्मारक सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान हुई।

 

कार्यक्रम में संबोधन के दौरान डिप्टी सीएम ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में जाड़े के लिए जूते नहीं होते थे और कभी-कभी चप्पल तक नहीं मिलती थी। संघर्ष की कहानी सुनाते-सुनाते ब्रजेश पाठक भावुक हो गए और उनके आंसू छलक पड़े।

 

गरीबी और संघर्ष की यादें

 

ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब भी मैं सड़क पर किसी गरीब को परेशान देखता हूं, तो दुखी हो जाता हूं। उन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों को साझा करते हुए बताया कि कैसे लखनऊ आने के समय उनकी अम्मा ने उन्हें एक स्टोव दिया था, जिस पर खाना बनाना सीखते-सिखाते उन्होंने कई मुश्किलें झेली। खाना बनाते समय आटे में पानी ज्यादा हो जाता या कभी-कभी आटा खराब हो जाता—ऐसी यादें सुनाते हुए सभागार में उपस्थित लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी छा गई।

 

बाबासाहेब में पिता की छवि देखी

 

अपने आंसू पोछते हुए ब्रजेश पाठक ने बताया कि उन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर में अपने पिता की छवि देखी। उन्होंने कहा कि उनके पिता जीवित नहीं थे, इसलिए उन्होंने बाबासाहेब को अपने पिता समान माना।

 

डिप्टी सीएम ने स्वयं को गरीबों का सेवक बताते हुए कहा कि गरीबी का दर्द उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव के माध्यम से महसूस किया है। उनका मानना है कि यही अनुभव उन्हें समाज के कमजोर वर्ग के लिए काम करने की प्रेरणा देता है।

 

 

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