
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का उमरी सब्जीपुर गांव 18 जनवरी की रात एक ऐसी दरिंदगी का गवाह बना, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। प्रेम संबंधों को “इज्जत पर धब्बा” मानते हुए एक ही परिवार ने अपनी ही बेटी और उसके प्रेमी को मौत के घाट उतार दिया। निजी स्कूल की शिक्षिका काजल और उसके प्रेमी अरमान की नृशंस हत्या कर शव जंगल में दफना दिए गए। जब इस दोहरे हत्याकांड की अंदरूनी कहानी सामने आई, तो पूरा इलाका सन्न रह गया।
कमरे से उठी आवाज और मौत का फैसला
रविवार, 18 जनवरी की रात करीब 12 बजे काजल के कमरे से आवाजें आने पर परिजनों का शक गहरा गया। दरवाजा खुलवाया गया तो अंदर अरमान मौजूद था। बस यहीं से गुस्सा हैवानियत में बदल गया। परिजनों ने अरमान पर हमला कर दिया। बचाने आई काजल पर भी कुदाल और फावड़े चलने लगे। घर के अंदर मची चीख-पुकार को बाहर तक पहुंचने नहीं दिया गया—कड़ाके की ठंड और घना कोहरा आरोपियों के लिए ढाल बन गया।
दो किलोमीटर घसीटकर ले गए, जंगल में उतारा मौत के घाट
आरोपियों ने दोनों को घसीटते हुए करीब दो किलोमीटर दूर जंगल की ओर ले गए। वहां बेरहमी से फावड़े से वार कर दोनों की हत्या कर दी गई। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए शवों को बोरी में भरकर गागन नदी के किनारे, मंदिर के पास जंगल में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। वारदात के बाद भी आरोपियों के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा—वे रोज की तरह सुबह-शाम घर से निकलते रहे।
गुमशुदगी दर्ज न होने से बढ़ा शक
हत्या के बाद भी काजल के परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई। यही बात पुलिस के लिए संदेह का कारण बनी। उधर अरमान के परिजन थाने पहुंचे तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि युवक “लड़की को लेकर भाग गया है।” परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
कड़ी पूछताछ में टूटा राज
बुधवार को जब एसएसपी के हस्तक्षेप पर युवती के भाई को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई, तो पूरी साजिश सामने आ गई। दोहरे हत्याकांड का खुलासा होते ही गांव में हड़कंप मच गया। जिस परिवार को लोग सामान्य मानते थे, उसी ने इतनी जघन्य वारदात को अंजाम दिया—यह किसी के गले नहीं उतर रहा था।
चार साल पुराना प्रेम, पंचायत का फरमान
जांच में सामने आया कि अरमान और काजल के बीच प्रेम प्रसंग चार साल पुराना था। तब गांव की पंचायत ने अरमान को गांव से बाहर भेज दिया था। वह दुबई चला गया और वहां टाइल्स का काम करने लगा। चार महीने पहले लौटने के बाद वह मुरादाबाद में काम कर रहा था। परिवार उसे फिर दुबई भेजना चाहता था, लेकिन वह नहीं गया। आरोप है कि रविवार रात साजिश के तहत उसे बहाने से बुलाया गया और मौत के घाट उतार दिया गया।
पुलिस भूमिका पर सवाल
अरमान के पिता हनीफ ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तहरीर में कई नाम देने के बावजूद दबाव बनाकर केवल तीन आरोपियों के नाम दर्ज किए गए। ग्रामीणों का भी आरोप है कि तीन दिन तक मामले को दबाकर रखा गया, जिससे आक्रोश फैल गया।
इलाके में तनाव, शोक में स्कूल
ऑनर किलिंग की शिकार काजल निजी स्कूल में शिक्षिका थी। उसे मेहनती और होनहार शिक्षक के रूप में जाना जाता था। उसकी मौत की खबर मिलते ही स्कूल में शोक सभा आयोजित की गई। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
यह वारदात सिर्फ दो जिंदगियों की हत्या नहीं, बल्कि समाज के उस चेहरे को उजागर करती है, जहां आज भी प्रेम को अपराध मानकर ‘इज्जत’ के नाम पर खून बहा दिया जाता है। अब सवाल यह है—क्या दोषियों को पूरी सजा मिलेगी और क्या सिस्टम अपनी चूक की जवाबदेही तय करेगा?