
जबलपुर के कठौंदा क्षेत्र में ‘ड्रीमलैंड सिटी’ कॉलोनी विकसित करने वाले रामदेव डेवलपर के संचालक गणेश विठ्ठल दास चांडक और ग्रामीण विकास विभाग की उपयंत्री अर्चना दुबे के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एफआईआर दर्ज की है।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि अविकसित कॉलोनी के लिए फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर एनओसी जारी कराया गया। आरोप है कि डेवलपर और उपयंत्री ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा और शासन के पास बंधक रखे गए 35 प्लॉट बेच दिए। कॉलोनी के लगभग 400 परिवार पिछले 10 सालों से पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
जांच में पता चला कि कॉलोनी के निर्माण के दोनों चरणों में बिजली की लाइनें और ट्रांसफार्मर तक नहीं लगाए गए थे, बावजूद इसके तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी द्वारा एनओसी जारी कर दी गई।
ईओडब्ल्यू ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार और पददुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है।