नई दिल्ली: 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले में एक भीड़ ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों फिलिप (10) व टिमोथी (6) को जीप में सोते हुए जिंदा जला दिया था। इस घटना को तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने दुनिया के काले कारनामों में शामिल बताया था।
ग्राहम स्टेन्स 1960 के दशक में भारत आए और 34 वर्षों तक कुष्ठ रोगियों की सेवा में लगे रहे। उन्होंने मयूरभंज में मिशनरी कार्य किया और स्थानीय लोगों के बीच आदर पाए। 22 जनवरी की रात, स्थानीय बजरंग दल के नेतृत्व में लगभग 50 लोगों की भीड़ ने उनके शिविर पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, यह हमला कथित धर्मांतरण विवाद से जुड़ा था।
हत्या के बाद 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दारा सिंह मुख्य आरोपी था, जिसे 31 जनवरी 2000 को गिरफ्तार किया गया। भुवनेश्वर की CBI अदालत ने 2003 में दारा सिंह को मौत की सजा और 12 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ओडिशा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने बाद में दारा सिंह की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
मुख्य दोषी दारा सिंह ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी याचिका दाखिल की है, जिसमें उसने 24 साल जेल में बिताने और युवावस्था में अपने कृत्य पर पछतावे का हवाला दिया है।
यह कांड न केवल भारत में मिशनरियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बना, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और मानवता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।