
मसूरी (सुनील सोनकर): प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध मसूरी आज कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रही है। शहर में नियमों को ताक पर रखकर प्लिंथ सर्टिफिकेट के सहारे बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। वन विभाग और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की कथित मिलीभगत से पहाड़ों को काटकर निर्माण किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में संवेदनशील क्षेत्रों, खड़े ढलानों और पहाड़ियों पर भी बिना उचित जांच के प्लिंथ सर्टिफिकेट जारी किए गए। वन विभाग द्वारा बिना मौके का निरीक्षण किए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी किया गया, जिसके आधार पर एमडीडीए ने नक्शों को मंजूरी दे दी।
सूत्रों के मुताबिक, मसूरी में अधिकतर नक्शे डोमेस्टिक श्रेणी में पास किए गए हैं, लेकिन वास्तविकता में वहां होटल, होमस्टे, कैफे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यह नियमों का उल्लंघन होने के साथ-साथ मसूरी की कैरींग कैपेसिटी के साथ भी खिलवाड़ है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पहले ही मसूरी की बढ़ती कैरींग कैपेसिटी को लेकर चेतावनी जारी की थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। नियमों के अनुसार मसूरी में 11 मीटर से अधिक ऊंचाई का निर्माण अनुमति प्राप्त नहीं है, बावजूद इसके कई इमारतें इससे ऊंची खड़ी की जा चुकी हैं।
स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि खनन विभाग मौन है और एमडीडीए के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर इस पूरी प्रक्रिया को अनदेखा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्लिंथ सर्टिफिकेट, एनओसी और नक्शा पास करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो मसूरी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।