
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने हाल ही में वेनेजुएला और ग्रीनलैंड पर अपने देश के दावे को बढ़ाया है। अगर अमेरिका ये दोनों क्षेत्र अपने राष्ट्र में शामिल कर लेता है, तो उसका क्षेत्रफल लगभग 12 लाख वर्ग मील (32 लाख वर्ग किलोमीटर) बढ़ जाएगा, जो कि भारत के कुल क्षेत्रफल के बराबर है। यह अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा भू-सम्पत्ति अधिग्रहण माना जाएगा।
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना
वेनेजुएला के पास लगभग 300 अरब बैरल कच्चे तेल का विशाल भंडार है। इस देश के प्राकृतिक संसाधनों की कुल वैल्यू लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं, ग्रीनलैंड के पास 1.5 मिलियन मीट्रिक टन रेयर अर्थ मेटल्स मौजूद हैं, जिनमें आयरन ओर, ग्रेफाइट, जिंक, कॉपर और सोना शामिल हैं। इसके अलावा ग्रीनलैंड के समुद्र में तेल और गैस भंडार होने का अनुमान है, जिसकी कीमत लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है।
अर्थव्यवस्था में तगड़ा बढ़ावा
अगर ये दोनों क्षेत्र अमेरिका के साथ मिल जाएं, तो देश को लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के प्राकृतिक संसाधन मिल सकते हैं। यह भारत की जीडीपी के लगभग पांच गुना के बराबर है। फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी 4.13 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिका की मौजूदा अर्थव्यवस्था लगभग 30.62 ट्रिलियन डॉलर की है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी बनाती है। इसके बाद चीन 19.4 ट्रिलियन डॉलर और जर्मनी 5.01 ट्रिलियन डॉलर के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
वैश्विक परिदृश्य पर असर
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे ट्रेड वॉर और अमेरिका की इस नई भू-नीति ने दुनिया के आर्थिक और राजनीतिक संतुलन को चुनौती दी है। यूरोप भी इस मामले में अमेरिका के विरोध में कदम उठाने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिका यह योजना सफल करता है, तो चीन और अन्य महाशक्तियों के लिए अमेरिका की बराबरी करना अब सपना ही रह जाएगा।