Wednesday, January 21

मायावती की मांग: संसद और विधानमंडलों के सत्र कम से कम 100 दिन चलाएं, घटते सत्रों पर जताई चिंता

 

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लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने देश के संसद और राज्यों के विधानमंडलों की कार्यवाही को सालाना कम से कम 100 दिन तक चलाने की मांग की है। उन्होंने घटते सत्रों और बार-बार होने वाले हंगामों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे जनउपयोगिता प्रभावित हो रही है।

 

मायावती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि संसद और विधानमंडलों के सत्र का घटता समय तथा हंगामेदार स्थगन जनहित के दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना था कि यह जरूरी है कि सरकार और विपक्ष दोनों गंभीर होकर इस पर अमल करें।

 

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भारतीय संसद और राज्य विधानमंडल देश की संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं। कार्यपालिका को देश और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखने का यह एक सशक्त माध्यम है। उनका सुझाव है कि सत्र को साल में 100 दिन के कैलेंडर के अनुसार शांति और सुव्यवस्था के साथ संचालित किया जाए।

 

साथ ही, मायावती ने श्रावस्ती में मदरसों को बंद करने के संबंध में हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच द्वारा दी गई यह निर्णय अति महत्वपूर्ण और समयोचित है। कोर्ट ने सरकारी मान्यता न होने के आधार पर मदरसों को बंद करने के आदेश दिए थे, जिस पर श्रावस्ती में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की गई।

 

मायावती ने यह भी कहा कि संभवत: सरकार की नीति प्राइवेट मदरसों के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में उचित संज्ञान लेकर इस प्रवृत्ति को रोकना चाहिए।

 

इस बयान के माध्यम से मायावती ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने और सरकारी निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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