
नई दिल्ली: रिटायर्ड मेजर जनरल आशीम कोहली की पहल ने यह साबित कर दिया कि सेना की वर्दी सिर्फ पहनने के लिए नहीं, बल्कि समाज सेवा में भी इस्तेमाल की जा सकती है। 36 साल की सेवा के बाद सेना से रिटायर हुए मेजर जनरल कोहली ने अपनी और अन्य रिटायर्ड सैनिकों की वर्दी को गलत हाथों में जाने से बचाने के साथ-साथ इसे गरीब बच्चों के लिए उपयोगी वस्त्रों और स्कूल बैग में बदलने का नेक काम शुरू किया।
‘हर कतरन कुछ कहती है’ थीम के तहत शुरू हुए इस मिशन में वर्दी का हर हिस्सा सम्मान के साथ रीसायकल किया जाता है। फाउंडेशन के अनुसार, देशभर से सैनिक अपनी वर्दी दान कर रहे हैं। वर्दी के कपड़े धोकर, काटकर और हाथ से सिलकर गरीब बच्चों के लिए स्कूल बैग, हल्के कंबल, मास्क, डायरी और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
रिटायर्ड सेना अधिकारियों का स्टार्ट–अप
SEWAJ नीसिम फाउंडेशन के माध्यम से यह पहल समाज की जरूरी जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है। यह स्टार्ट-अप न केवल वर्दियों के पुन: उपयोग को सुनिश्चित करता है, बल्कि रोजगार सृजन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में भी योगदान देता है।
स्कूली बच्चों के लिए खास बैग
इन बैगों को गरीब बच्चों के कंधों पर टांगकर शिक्षा में सहारा दिया जाता है। बच्चे पढ़ाई पूरी करने के बाद बैग वापस फाउंडेशन को लौटाते हैं। खराब होने पर कपड़े को रेशों में बदला जाता है और मास्क, डायरी जैसी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। वर्दी का एक भी धागा बेकार नहीं जाता।
अब तक 40,000 वर्दियाँ रिसायकल हो चुकी हैं
तीनों सेनाओं—इंडियन आर्मी, इंडियन एयर फ़ोर्स और इंडियन नेवी—की वर्दियों को इकट्ठा कर एसोसिएट NGO को भेजा जाता है। वहां से कपड़े और धागों का इस्तेमाल करके नए प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं।
मेजर जनरल कोहली की यह पहल न केवल रिटायर्ड सैनिकों की वर्दियों को सम्मान देती है, बल्कि समाज और जरूरतमंदों की मदद में एक मिसाल भी पेश करती है।