
प्रयागराज: माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से रोकने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मेला प्रशासन की ओर से स्वामी को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा गया था, लेकिन अब स्वामी के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजकर पलटवार किया है।
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि प्रशासन की कार्रवाई अपमानजनक है और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बराबर है। नोटिस में प्रशासन से 24 घंटे में अपने पत्र को वापस लेने की मांग की गई है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो मानहानि और अवमानना के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से कहा गया है कि शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। प्रशासन का हस्तक्षेप कोर्ट की गरिमा को चुनौती देने जैसा है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
नोटिस में यह भी बताया गया कि 19 जनवरी की रात पुलिस बल के साथ प्रशासन ने शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा किया, जबकि स्वामी सो रहे थे। इससे ‘जगद्गुरु शंकराचार्य’ संस्था का अनादर और अपमान हुआ।
मेला प्रशासन ने स्वामी से शंकराचार्य पद की वैधानिकता के प्रमाण मांगे थे। इसके जवाब में स्वामी की ओर से आठ पन्नों में उत्तर दिया गया। स्वामी ने बताया कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जबकि 12 सितंबर 2022 को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के अगले दिन ही उनका पट्टाभिषेक शंकराचार्य के तौर पर हो चुका था।